UP: बाराबंकी तहसील रामनगर के एल्गिन ब्रिज-संजय सेतु के पास घाघरा नदी का जलस्तर बुधवार को कुछ कम हुआ है, लेकिन नदी अभी भी खतरे के लाल निशान से ऊपर बह रही है। जलस्तर में गिरावट से तराई क्षेत्र के ग्रामीणों ने थोड़ी राहत महसूस की है। हालांकि बाढ़ प्रभावित इलाकों में खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
सुबह 10 बजे 106.590 मीटर दर्ज हुआ जलस्तर
केंद्रीय जल आयोग कार्यालय के सामने नदी के जलस्तर की बुधवार सुबह 10 बजे निगरानी की गई। आयोग के कर्मचारी पवन कुमार के मुताबिक घाघरा का जलस्तर 106.590 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के लाल निशान से करीब 52 सेंटीमीटर ऊपर है। पिछले कुछ दिनों में तेजी से बढ़े जलस्तर के बाद अब इसमें धीरे-धीरे कमी देखी जा रही है।
मंगलवार शाम 73 सेंटीमीटर ऊपर पहुंचा था पानी
पवन कुमार ने बताया कि मंगलवार शाम छह बजे घाघरा नदी का जलस्तर 106.800 मीटर तक पहुंच गया था। उस समय नदी खतरे के निशान से करीब 73 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी। जलस्तर बढ़ने के कारण रामनगर के तराई क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई थी और कई स्थानों पर खेतों व निचले इलाकों में पानी पहुंच गया था।
जलस्तर घटने से ग्रामीणों को मिली थोड़ी राहत
बुधवार सुबह नदी के पानी में करीब 21 सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई। इससे बाढ़ प्रभावित गांवों में रहने वाले लोगों को कुछ राहत मिली है। हालांकि नदी अभी भी डेंजर लेवल के ऊपर है, ऐसे में निचले इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों की चिंताएं बनी हुई हैं। पानी घटने का सिलसिला जारी रहने पर प्रभावित क्षेत्रों में हालात सामान्य होने की उम्मीद है।
केंद्रीय जल आयोग लगातार कर रहा निगरानी
घाघरा के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के बीच ग्रामीण नदी की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। केंद्रीय जल आयोग की टीम भी जलस्तर की निगरानी कर रही है। फिलहाल पानी में कमी राहत का संकेत है, लेकिन अगर जलस्तर दोबारा बढ़ता है तो तराई क्षेत्र के लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इसलिए प्रशासनिक स्तर पर भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।














