प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूपी के लिए 60 हजार करोड़ की विकास व निवेश परियोजनाओं की नींव रखते हुए कहा कि नीयत साफ हो तो बड़े से बड़ा विकास हो सकता है। देश की तरक्की में उद्योगपतियों के योगदान की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि उनको चोर-लुटेरा कहना या अपमानित करना पूरी तरह गलत है। अगर इरादे नेक और ईमानदार हों तो किसी के साथ खड़े होने से कोई दाग नहीं लगता। प्रधानमंत्री ने यह बात रविवार को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में हुए 81 निवेश परियोजनाओं के शिलान्यास समारोह (ग्राउंड ब्रेकिंग सेरमनी) में कही। भारी निवेश से उत्साहित प्रधानमंत्री ने कहा कि यह ग्राउंड ब्रेकिंग सेरमनी नहीं रिकार्ड ब्रेकिंग सेरमनी बन गई है। पांच महीने में इतना निवेश, सचमुच अकल्पनीय है और यूपी के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है।
नरेंद्र मोदी ने शनिवार की तरह रविवार को भी कांग्रेस को निशाने पर रखा। कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उद्योगपतियों के साथ का विरोध करने वाले पर्दे के पीछे तो उनसे खूब मुलाकात करते हैं और सामने आकर उनका ही विरोध करते हैं। उद्योगपतियों का साथ जरूरी है लेकिन जो गलत करेगा उसे या तो देश से भागना पड़ेगा या फिर जेल में जीवन बिताना पड़ेगा। यह सबको मालूम है कौन लोग किसके हवाई जहाज से घूमते रहे। यही इन्हीं उद्योगपतियों को चोर कहते हैं।
मोदी यही नहीं रुके। बोले- हम उनमें से नहीं है की उद्योगपति के साथ ना खड़े हों, कई लोगों की एक भी फ़ोटो इनके साथ नहीं होगी। मोदी ने महात्मा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि उनका जीवन जितना पवित्र था, उनको बिड़ला के परिवार में जाकर रहने में कभी संकोच नहीं हुआ क्योंकि उनकी नीयत साफ थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह एक महीने में यह छठा दौरा था। वह शनिवार को लखनऊ आए और चले गए। रविवार को फिर आए। मोदी ने इसे यूपी से अपने रिश्ते से जोड़ते हुए कहा कि मैं यहां से सांसद और यूपी का ही हूं, इसलिए एक बार आऊं, दो बार या पांच बार फर्क नहीं पड़ता। मैं यहां आता नहीं हूं, मैं यहीं का हूं। मैंने यूपी की 22 करोड़ जनता को वचन दिया था कि उनके प्यार को ब्याज़ समेत लौटाऊंगा। यहां जो परियोजनाएं शुरु हो रही हैं वो उसी वचनबद्धता का हिस्सा हैं।
पीएम ने शनिवार को अटल बिहारी वाजपेयी को याद किया। रविवार को वह उनकी चर्चा करना नहीं भूले। कहा कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी कहते रहे हैं कि वो ऐसा भारत देखना चाहते हैं जो समृद्ध हो, सक्षम हो और संवेदनशील हो। जहां गांव और शहरों के बीच खाई ना हो। जहां केंद्र और राज्य में, श्रम और पूंजी में, प्रशासन और नागरिक में फर्क ना हो।
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