दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में 6-7 जनवरी 2026 की दरमियानी रात MCD ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर रामलीला मैदान से सटे करीब 39,000 वर्ग फुट अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की। इस दौरान मस्जिद से लगे बारात घर, डायग्नोस्टिक सेंटर, कुछ दुकानों और पार्किंग को गिराया गया। मस्जिद और कब्रिस्तान की मुख्य संरचना पूरी तरह सुरक्षित रही, लेकिन अफवाह फैली कि मस्जिद गिराई जा रही है, जिससे भीड़ जुट गई और पत्थरबाजी शुरू हो गई। पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल कर स्थिति नियंत्रित की, जिसमें 5 पुलिसकर्मी घायल हुए।
दस्तावेजों की अनुपस्थिति
विवाद की मुख्य वजह 1940 में लीज पर दी गई सिर्फ 0.195 एकड़ जमीन है, जिसमें मस्जिद और कब्रिस्तान शामिल है। इससे आगे की जमीन पर बने ढांचों को MCD ने अवैध माना क्योंकि मस्जिद कमेटी या दिल्ली वक्फ बोर्ड वैध मालिकाना हक के दस्तावेज पेश नहीं कर सके। कमेटी दावा करती है कि यह 100 साल पुरानी वक्फ संपत्ति है और पुराने कागजात वक्फ बोर्ड के पास हैं, लेकिन कोर्ट में सबूत नहीं दिए जा सके। MCD के दिसंबर 2025 के आदेश में स्पष्ट कहा गया कि अतिरिक्त जमीन पर व्यावसायिक उपयोग (बारात घर, क्लिनिक) सार्वजनिक भूमि का दुरुपयोग है।
कोर्ट के आदेश और कानूनी स्थिति
यह कार्रवाई दिल्ली हाईकोर्ट के 12 नवंबर 2025 के आदेश पर आधारित थी, जिसमें रामलीला मैदान में अतिक्रमण हटाने के लिए तीन महीने का समय दिया गया था। मस्जिद कमेटी ने MCD के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी, कोर्ट ने नोटिस जारी किया लेकिन अंतरिम रोक नहीं लगाई। जुमे की नमाज (10 जनवरी) को देखते हुए इलाके में भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई है और धारा 163 लागू है।
पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारियां
पत्थरबाजी में अब तक 12 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं, जिसमें एक नाबालिग शामिल है। पुलिस ने CCTV, बॉडी कैमरा और वायरल वीडियो से 30 से ज्यादा उपद्रवियों की पहचान की है। जांच में सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वाले 10 इन्फ्लुएंसर और यूट्यूबर्स की भूमिका संदिग्ध पाई गई, जिनमें एक यूट्यूबर सलमान को नोटिस भेजा गया। पुलिस का कहना है कि यह हिंसा सुनियोजित लगती है और अफवाहों से भड़की।
वर्तमान हालात और सुरक्षा व्यवस्था
कार्रवाई के बाद इलाका शांत है, मलबा हटा दिया गया और सुरक्षा बढ़ा दी गई है। जुमे की नमाज शांतिपूर्ण रहे, इसके लिए पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स तैनात हैं। मस्जिद कमेटी ने लोगों से घर या पास की मस्जिदों में नमाज पढ़ने की अपील की है। अधिकारी बार-बार स्पष्ट कर रहे हैं कि मस्जिद पूरी तरह सुरक्षित है और कार्रवाई सिर्फ अवैध अतिक्रमण तक सीमित थी।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और आगे की संभावना
इस घटना पर राजनीतिक बयानबाजी हुई, कुछ नेताओं ने इसे वोट बैंक पॉलिटिक्स से जोड़ा। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने वक्फ बोर्ड को सुप्रीम कोर्ट जाने की सलाह दी। मामला अभी हाईकोर्ट में लंबित है, जहां वक्फ संपत्ति के दस्तावेज और अधिकार क्षेत्र पर बहस होगी। इलाके में तनाव कम हुआ है, लेकिन दस्तावेजों का मुद्दा लंबा खिंच सकता है।














































