बांदा: 11 साल बाद आया फैसला, गैंगस्टर एक्ट में पिता-पुत्र को 5-5 साल की सजा

बांदा: गैंगस्टर एक्ट के करीब 11 साल पुराने मामले में अदालत ने दो आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 5-5 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। दोनों दोषियों पर अदालत ने 6-6 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। मामला बदौसा थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां 25 जून 2015 को भुल्ली उर्फ शिवशरण यादव और उसके बेटे लाला यादव के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।

गिरोह बनाकर आपराधिक गतिविधियों का आरोप

पुलिस के मुताबिक, बरगदहा पुरवा मजरा उतरवा निवासी भुल्ली उर्फ शिवशरण यादव गिरोह का सरगना था, जबकि उसका बेटा लाला यादव गिरोह का सक्रिय सदस्य बताया गया। आरोप था कि दोनों आर्थिक और भौतिक लाभ हासिल करने के लिए आपराधिक गतिविधियों में शामिल थे। इनके कृत्यों के चलते क्षेत्र में भय और असुरक्षा का वातावरण पैदा होने की बात अभियोजन ने अदालत में रखी।

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गवाहों और दस्तावेजों से मजबूत हुआ अभियोजन पक्ष

मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने अदालत में पांच मौखिक गवाहों के बयान दर्ज कराए। इसके अलावा गैंगचार्ट, एफआईआर, तहरीर, आरोपपत्र और अभियोजन स्वीकृति सहित कई अहम दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। विशेष लोक अभियोजक गैंगस्टर एक्ट सौरभ सिंह ने प्रभावी पैरवी करते हुए अभियोजन के साक्ष्यों और आरोपों को न्यायालय के सामने मजबूती से रखा।

अदालत ने दोनों को माना दोषी

मामले में पेश किए गए साक्ष्यों और अभियोजन की दलीलों पर विचार करने के बाद विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट)/अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीपाल सिंह ने 18 अगस्त 2026 को फैसला सुनाया। न्यायालय ने धारा 3, उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 के तहत भुल्ली उर्फ शिवशरण यादव और लाला यादव को दोषी करार दिया।

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जुर्माना नहीं देने पर अतिरिक्त सजा

अदालत ने दोनों दोषियों को 5-5 वर्ष के कठोर कारावास के साथ 6-6 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में दोनों को तीन-तीन महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। करीब 11 वर्ष पुराने मामले में आया यह फैसला पुलिस कार्रवाई और अभियोजन की प्रभावी पैरवी के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

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