इटावा: शिक्षिका के निलंबन पर सवाल, 5 दिन में आदेश से निरस्तीकरण तक की टाइमलाइन बनी चर्चा का विषय

इटावा: बेसिक शिक्षा विभाग में महिला सहायक अध्यापक प्रीती बघेला से जुड़ी विभागीय कार्रवाई सार्वजनिक होने के बाद अब कार्रवाई की पूरी टाइमलाइन पर सवाल उठने लगे हैं। 31 अगस्त को निलंबन आदेश, 3 सितंबर को उसकी रिसीविंग के बाद उसी दिन निरस्तीकरण और 5 सितंबर को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने से विभागीय प्रक्रिया चर्चा में आ गई है।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. राजेश कुमार की ओर से 31 अगस्त 2026 को निलंबन आदेश जारी किया गया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसकी प्रति शिक्षिका को 3 सितंबर को रिसीव कराई गई और कुछ ही समय बाद उसी दिन निलंबन आदेश निरस्त कर दिया गया।

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बीएसए की ओर से एक वीडियो में निलंबन पत्र गलतफहमी के कारण रिसीव कराए जाने की बात कही गई है। हालांकि कार्रवाई सार्वजनिक होने के बाद सवाल यह है कि यदि मामला केवल प्रशासनिक गलतफहमी का था तो निलंबन आदेश जारी होने से लेकर उसकी तामील तक प्रक्रिया कैसे चली?

इसके बाद 5 सितंबर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। नोटिस में 2 सितंबर को शिक्षिका द्वारा कार्यालय के मुख्य द्वार पर मीडिया को बाइट देने और पूर्व अनुमति नहीं लेने का उल्लेख बताया गया है। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब 2 सितंबर की मीडिया बाइट निलंबन आदेश के बाद की घटना थी, तो उसका विभागीय कार्रवाई में क्या आधार बना? निलंबन निरस्त करने के बाद महज दो दिन में नोटिस जारी करने के पीछे विभाग का तर्क क्या था?

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31 अगस्त से 5 सितंबर तक की कार्रवाई की टाइमलाइन ने विभागीय निर्णय प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब पूरे मामले में संबंधित आदेशों, अभिलेखों और कार्रवाई के आधार को स्पष्ट किए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है, ताकि यह साफ हो सके कि मामला प्रशासनिक गलतफहमी था या कार्रवाई की प्रक्रिया में कोई अन्य वजह रही।

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