नई दिल्ली/कोलकाता। पश्चिम बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और बंगाल संगठन प्रभारी सुनील बंसल की रणनीतिक भूमिका सबसे चर्चित हो रही है। अमित शाह के बेहद करीबी माने जाने वाले सुनील बंसल को जिस भी राज्य का संगठन प्रभारी बनाया जाता है, वहां भाजपा की सरकार बनती है — यह फॉर्मूला बंगाल में भी कामयाब रहा।
बिना शोर के बड़े काम करने वाले नेता
सुनील बंसल को “बिना इंटरव्यू और बिना शोर-शराबे” के काम करने वाला नेता माना जाता है। उन्होंने बंगाल में टिकट वितरण, बूथ स्तर की तैयारी, कार्यकर्ता प्रबंधन और रणनीति बनाने में अहम भूमिका निभाई। महीनों तक वे लगातार बंगाल में डटे रहे और बूथ से लेकर रैली तक हर व्यवस्था पर बारीक नजर रखी।
कार्यकर्ताओं के नाम तक याद रखते हैं बंसल
भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि सुनील बंसल क्षेत्रवार कार्यकर्ताओं के नाम तक याद रखते हैं। यही कारण है कि संगठन स्तर पर उन्होंने बेहतरीन समन्वय स्थापित किया। बंगाल में भाजपा की इस जीत को सुनील बंसल की रणनीतिक सूझ-बूझ का नतीजा माना जा रहा है।
यूपी में भी किया था करिश्मा
सुनील बंसल 2014 से 2022 तक उत्तर प्रदेश में भाजपा के संगठन महामंत्री रहे। उन्होंने 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में पार्टी को ऐतिहासिक जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। 2022 के चुनाव में एंटी-इंकंबेंसी के बावजूद भाजपा की बड़ी जीत में उनका योगदान सर्वमान्य है।
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अमित शाह के भरोसेमंद
अमित शाह के सबसे भरोसेमंद और करीबी नेताओं में शुमार सुनील बंसल को भाजपा का ‘रणनीतिक जादूगर’ भी कहा जाता है। जहां भी उन्हें जिम्मेदारी दी गई, उन्होंने संगठन को मजबूत कर नतीजे दिलाए हैं।
पश्चिम बंगाल में भाजपा की इस बड़ी कामयाबी के बाद सुनील बंसल की तारीफ पार्टी के अंदर और बाहर दोनों जगह हो रही है। 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए भी बंसल की रणनीति पर भाजपा की नजरें टिकी हुई हैं।











































