अयोध्या : अयोध्या के राम मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए दान की राशि में करोड़ों रुपये के गबन का मामला सामने आने के बाद सनसनी फैल गई है। दान राशि गिनने की ड्यूटी से जुड़े पांच मुख्य किरदार लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रमाशंकर पकड़े गए हैं। इनके खिलाफ ठोस सबूत मिले हैं और इन्होंने चोरी कबूल भी कर ली है। अब तक 2.98 करोड़ रुपये की रिकवरी हो चुकी है, जबकि हेरफेर की राशि 8 करोड़ से अधिक बताई जा रही है। मामले में बड़े साजिशकर्ता की आशंका जताई जा रही है।
पांच मुख्य आरोपी और उनकी भूमिका
दान राशि की गिनती और रखरखाव से जुड़े ये पांचों व्यक्ति लंबे समय से मंदिर ट्रस्ट से जुड़े थे। सूत्रों के मुताबिक इन्होंने दान की रकम में हेरफेर कर उसे अलग-अलग जगहों पर स्थानांतरित किया। पकड़े जाने के बाद इनकी निशानदेही पर 2.98 करोड़ रुपये बरामद किए गए हैं। इनमें नकदी, जेवरात और बैंक खातों में जमा राशि शामिल है। विशेष रूप से अवनीश के खाते से 5 लाख रुपये और लवकुश के घर से 10-12 लाख रुपये बरामद हुए।
बड़े शख्स की साजिश की आशंका
मामला सिर्फ इन पांचों तक सीमित नहीं लग रहा है। इतने संवेदनशील स्थल पर लंबे समय तक हेरफेर चलता रहा और किसी को भनक तक नहीं लगी, यह कई सवाल खड़े करता है। सूत्रों का कहना है कि क्या ट्रस्ट से जुड़ा कोई बड़ा पदाधिकारी या बाहरी व्यक्ति इसकी साजिश में शामिल है? अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जांच एजेंसियां इस दिशा में भी काम कर रही हैं।
ट्रस्ट की खामोशी और उठते सवाल
मंदिर ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। पूरी तरह चुप्पी साधे रखने से तरह-तरह की चर्चाएं और कयासबाजी तेज हो गई है। ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोगों पर विशेष रूप से उंगलियां उठ रही हैं। एक पूर्व पदाधिकारी पहले ही कैमरे के सामने गंभीर आरोप लगा चुके हैं।
टिन्नू पर सबसे ज्यादा चर्चा
ट्रस्ट से जुड़े एक वरिष्ठ पदाधिकारी (टिन्नू) का नाम सबसे ज्यादा उछल रहा है। सूत्रों के अनुसार टिन्नू का हर काम में हस्तक्षेप रहता था। पकड़े गए आरोपी रमाशंकर उनके रिश्तेदार भी बताए जा रहे हैं। टिन्नू दशकों से इस पदाधिकारी के करीबी रहे हैं। इस पूरे प्रकरण में उनकी भूमिका की जांच की मांग तेज हो गई है।
पुलिस की भूमिका और खामोशी
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी तक कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है, इसलिए औपचारिक कार्रवाई सीमित है। हालांकि सूत्र बताते हैं कि पूछताछ और रिकवरी की प्रक्रिया में पुलिस की एक टीम सक्रिय रूप से शामिल है। संदिग्धों के घरों, ठिकानों और बैंक खातों की छानबीन जारी है।
SIT गठित, 15 दिनों में रिपोर्ट
राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है। इसमें लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, लखनऊ जोन की पुलिस महानिरीक्षक किरन एस और विशेष वित्त सचिव नीलरतन शामिल हैं। SIT को 7 दिनों में प्रारंभिक रिपोर्ट और 15 दिनों में अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपनी है।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
मामले को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गए हैं। सीतापुर में खाद्य एवं रसद मंत्री मनोज कुमार पांडेय ने कहा कि राम मंदिर चढ़ावा मामले में सवाल उठाने वाले पहले अपना इतिहास देख लें। उन्होंने कहा कि रामभक्तों पर गोली चलवाने वालों को इस मुद्दे पर बोलने का नैतिक अधिकार नहीं है।
आगे क्या?
ट्रस्ट अब गोपनीय जांच में जुटा है। पकड़े गए आरोपी और अन्य संभावित लोगों की पूछताछ जारी है। अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद ही गबन की सही राशि और बड़े मास्टरमाइंड का पता चल सकेगा। राम मंदिर जैसे पवित्र स्थल से जुड़े इस घोटाले ने पूरे देश में आक्रोश पैदा कर दिया है। भक्तों की आस्था से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति पर सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो रही है।









































