‘भला हो रिजिजू का, जो संसद को वक्फ प्रॉपर्टी होने से बचा लिया…,’ संसद में बोले JDU सांसद ललन सिंह

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) ने बुधवार को लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल (Waqf Amendment Bill) पेश किया। इस पर सुबह 12 बजे से 8 घंटे की चर्चा शुरू हुई। बिल के जरिए वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को कानूनी रूप से नियंत्रित करने का प्रस्ताव रखा गया है।

TDP और JDU का समर्थन, JDU सांसद ने दी प्रतिक्रिया

बिल को केंद्र की सहयोगी पार्टियां TDP और JDU का समर्थन मिला। JDU सांसद ललन सिंह (Lallan Singh) ने बिल का समर्थन करते हुए कहा, “भला हो रिजिजू का, जो संसद को वक्फ प्रॉपर्टी होने से बचा लिया।”

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रिजिजू का बयान

चर्चा के दौरान मंत्री किरेन रिजिजू ने 58 मिनट तक अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि 2014 में कांग्रेस सरकार ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले 123 प्राइम प्रॉपर्टी दिल्ली वक्फ बोर्ड को ट्रांसफर कर दी थीं। उन्होंने इसे अल्पसंख्यक वोट बैंक की राजनीति करार दिया और कहा कि अगर यह बिल आज पेश नहीं होता, तो संसद भवन पर भी वक्फ संपत्ति होने का दावा किया जा सकता था।

विपक्ष का विरोध, सपा और TMC ने जताई आपत्ति

समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने बिल का विरोध करते हुए इसे “मुस्लिमों से घर-दुकान छीनने की साजिश” बताया। वहीं, TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि वक्फ संपत्ति मुस्लिम समुदाय के लिए रीढ़ की हड्डी जैसी है और इसे छेड़ना धार्मिक भावनाओं पर चोट पहुंचाने जैसा है।

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मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की चेतावनी

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने बिल का कड़ा विरोध जताया है। बोर्ड के प्रवक्ता डॉ. सैयद कासिम रसूल इलियास ने कहा, “अगर यह बिल पास हुआ तो हम देशभर में आंदोलन करेंगे।” उन्होंने इसे भेदभावपूर्ण और सांप्रदायिक रूप से प्रेरित करार दिया और कानूनी लड़ाई का ऐलान किया।

सरकार और विपक्ष आमने-सामने

इस बिल को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव तेज हो गया है। जहां सरकार इसे वक्फ संपत्तियों को कानूनी रूप से नियंत्रित करने का जरिया बता रही है, वहीं विपक्ष और मुस्लिम संगठनों ने इसे समुदाय के अधिकारों पर हमला करार दिया है। अब देखना होगा कि इस बिल का भविष्य क्या होगा और यह संसद में पास होगा या नहीं।

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