UP: सावन माह में कांवड़ यात्रा अपने चरम पर पहुंच चुकी है. देहरादून रोड से लेकर अंबाला रोड तक चारों ओर पीतांबर वस्त्र धारण किए शिवभक्तों का सैलाब उमड़ रहा है.”बम-बम भोले” और “हर-हर महादेव” के जयघोष से पूरा कांवड़ मार्ग भक्तिमय माहौल में डूबा हुआ है. हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर हजारों कांवड़िए पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की ओर रवाना हो रहे हैं. अब तक लाखों श्रद्धालु सहारनपुर से होकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ चुके हैं.
इस बार पारंपरिक बांस की कांवड़ों की अपेक्षा गंगाजल के लोटों वाली आकर्षक कांवड़ युवाओं की पहली पसंद बन गई हैं. रंग-बिरंगी और कलात्मक डिजाइनों वाली विशाल कांवड़ें राहगीरों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं.हरियाणा के कैथल जा रहे कांवड़िया लखविंदर ने बताया कि उन्होंने 2 अगस्त की रात यात्रा शुरू की थी और हर साल कांवड़ लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक करने जाते हैं.
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उनका कहना है कि पहले अधिकतर लोग बांस की कांवड़ लेकर चलते थे, लेकिन अब लोटा कांवड़ का क्रेज तेजी से बढ़ा है. उन्होंने प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं की भी सराहना करते हुए कहा कि रास्ते में उन्हें किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा.वहीं, कुरुक्षेत्र के पास जैतसर क्षेत्र के रहने वाले कांवड़िया मोहित ने बताया कि उन्होंने 2 अगस्त को यात्रा शुरू की थी.
उनका कहना है कि योगी सरकार और प्रशासन की ओर से सुरक्षा, यातायात, चिकित्सा और शिविरों की बेहतर व्यवस्था की गई है. उन्होंने कहा कि आजकल श्रद्धालुओं में लोटा कांवड़ की मांग अधिक है और युवा इसे विशेष रूप से पसंद कर रहे हैं.सहारनपुर से गुजर रही कांवड़ यात्रा में भक्ति, उत्साह और आधुनिकता का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है, जहां बदलते समय के साथ कांवड़ का स्वरूप भी बदलता नजर आ रहा है.



















































