भारत निर्वाचन आयोग ने चुनावी सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। लोकसभा चुनाव 2024 के बाद अब आगामी विधानसभा चुनावों में ड्यूटी पर तैनात केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के जवानों के लिए GPS आधारित ट्रैकिंग सिस्टम अनिवार्य किया जाएगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि ड्यूटी के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और जवानों की गतिविधियों पर रीयल-टाइम निगरानी रखी जाएगी।
सुरक्षा में ढिलाई की शिकायतों के बाद निर्णय
आयोग को पिछले चुनावों के दौरान कई शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिनमें कुछ जवानों के मतदान केंद्रों पर निष्क्रिय रहने, मोबाइल चलाने या आराम करने की बात सामने आई थी। इन घटनाओं के वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। सुरक्षा व्यवस्था में संभावित चूक को देखते हुए आयोग ने तकनीक के माध्यम से निगरानी बढ़ाने का फैसला लिया है, ताकि मतदान प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित और निष्पक्ष बनी रहे।
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GPS सिस्टम की कार्यप्रणाली
नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक जवान को GPS युक्त स्मार्ट डिवाइस उपलब्ध कराया जाएगा, जो उसकी लोकेशन और गतिविधि पर नजर रखेगा। यदि कोई जवान निर्धारित समय से अधिक एक ही स्थान पर स्थिर पाया जाता है, तो कंट्रोल रूम को तुरंत अलर्ट प्राप्त होगा। साथ ही, डिवाइस में आपात स्थिति के लिए SOS बटन भी होगा, जिससे आवश्यकता पड़ने पर तुरंत सहायता ली जा सकेगी। पूरा डेटा केंद्रीय मॉनिटरिंग सेंटर में संग्रहित किया जाएगा।
गृह मंत्रालय और CAPF की भागीदारी
यह निर्णय गृह मंत्रालय और विभिन्न केंद्रीय बलों, केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल, सीमा सुरक्षा बल, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, सशस्त्र सीमा बल और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल ,के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श के बाद लिया गया। सभी बलों को निर्देश दिया गया है कि ड्यूटी के दौरान GPS डिवाइस पहनना अनिवार्य होगा। इसे बंद करना या न पहनना अनुशासनहीनता माना जाएगा।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को और सुदृढ़ करेगा। इससे न केवल जवानों की जवाबदेही बढ़ेगी, बल्कि मतदान केंद्रों की सुरक्षा भी अधिक प्रभावी होगी। आयोग ने सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं और स्पष्ट किया है कि भविष्य के सभी चुनावों में यह व्यवस्था लागू रहेगी।
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