नवाबगंज, फर्रुखाबाद : जनपद में अवैध रूप से हरे पेड़ों की कटाई का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शमशाबाद विकासखंड के नगला दमू गांव में बिना अनुमति सागौन के 100 से अधिक पेड़ काटे जाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि लकड़ी ठेकेदारों ने रात के अंधेरे में तीन दिनों तक लगातार पेड़ों की कटाई की और शिकायत के बावजूद समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। मामला तूल पकड़ने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी।
जानकारी के अनुसार, थाना नवाबगंज क्षेत्र के नगला दमू गांव में करीब तीन बीघा भूमि पर वर्षों पुराने सागौन के पेड़ लगे थे। आरोप है कि लकड़ी ठेकेदारों ने बिना किसी वैध अनुमति के रात के समय पेड़ों की कटाई शुरू कर दी। जब ग्रामीणों ने इसका विरोध किया और वन विभाग को सूचना दी, तब वन दरोगा मौके पर पहुंचे और कटाई रुकवाने की बात कही। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि इसके बावजूद अगले ही दिन फिर कटाई शुरू हो गई और लगातार तीन दिनों में 100 से अधिक पेड़ काट दिए गए।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया, जिससे ठेकेदारों के हौसले बुलंद रहे। आखिरकार मामला जिला वन अधिकारी तक पहुंचा, जिसके बाद वन विभाग की टीम गांव पहुंची। अधिकारियों ने कटे हुए पेड़ों की जड़ों की गिनती की, उनकी मोटाई का आकलन किया और पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी।
क्षेत्रीय वन अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में लगभग 70 पेड़ों की कटाई की पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा कि पेड़ों का व्यास अपेक्षाकृत कम है। पहले इस मामले में 35 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया था, जबकि अब जांच के आधार पर करीब एक लाख रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जाएगा। विभाग अन्य कानूनी पहलुओं की भी जांच कर रहा है।
इस घटना ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से बिना अनुमति पेड़ों की कटाई का खेल चल रहा है और कई बार विभागीय स्तर पर मिलीभगत की चर्चाएं भी होती रही हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है।
गौरतलब है कि कुछ समय पहले कायमगंज से अवैध लकड़ी लेकर जा रही एक ट्रैक्टर-ट्रॉली का वन विभाग ने पीछा किया था। ट्रैक्टर शमशाबाद स्थित एक आरा मशीन तक पहुंचा, जहां वन विभाग की टीम के साथ अभद्रता किए जाने का मामला भी दर्ज हुआ था। वहीं हाल ही में कमालगंज क्षेत्र में भी अवैध पेड़ कटान का मामला सामने आया था। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं से साफ है कि जिले में अवैध कटान पर प्रभावी अंकुश लगाने की चुनौती वन विभाग के सामने बनी हुई है।
अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ केवल जुर्माने की कार्रवाई होती है या फिर अवैध कटान के पूरे नेटवर्क पर भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाती है।
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