बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती (Mayawati) ने पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) के कार्यक्रम को लेकर उठे प्रोटोकॉल विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पदों का सम्मान करना हर नागरिक और राजनीतिक दल की जिम्मेदारी है और किसी भी स्थिति में इन पदों का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर अपने बयान में इसे लोकतंत्र के लिए अनुचित करार दिया।
भारतीय संविधान के आदर्श व मान-मर्यादा के मुताबिक़ सभी को मा. राष्ट्रपति पद का सम्मान करना एवं इनके प्रोटोकाल का भी ध्यान रखना ज़रूरी तथा इस पद का किसी भी रूप में राजनीतिकरण करना ठीक नहीं है।
वर्तमान में देश की राष्ट्रपति एक महिला होने के साथ-साथ वे आदिवासी समाज से भी हैं। लेकिन…— Mayawati (@Mayawati) March 8, 2026
मायावती ने बताया कि वर्तमान राष्ट्रपति न केवल महिला हैं बल्कि आदिवासी समुदाय से भी आती हैं। ऐसे संवैधानिक पद की गरिमा का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में उनके दौरे के दौरान जो हालात सामने आए, वे दुर्भाग्यपूर्ण हैं और इससे संवैधानिक पद की प्रतिष्ठा प्रभावित हुई।
संसद और अन्य संवैधानिक पदों पर भी जताई चिंता
मायावती ने अपने बयान में केवल राष्ट्रपति तक ही सीमित नहीं रहते हुए संसद और अन्य संवैधानिक पदों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि हाल के समय में लोकसभा अध्यक्ष और अन्य पदों के राजनीतिकरण की प्रवृत्ति बढ़ी है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए हानिकारक है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि संवैधानिक पदों को दलगत राजनीति से ऊपर रखा जाए।
सिलीगुड़ी कार्यक्रम में प्रोटोकॉल विवाद की पृष्ठभूमि
पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में आयोजित आदिवासी कार्यक्रम के दौरान यह विवाद शुरू हुआ। आरोप है कि कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी या राज्य सरकार का कोई वरिष्ठ मंत्री मौजूद नहीं था। कार्यक्रम स्थल छोटा और व्यवस्थाओं में कमी के कारण राष्ट्रपति ने असंतोष व्यक्त किया। इसके बाद भाजपा ने टीएमसी सरकार पर राष्ट्रपति और आदिवासी समाज के अपमान का आरोप लगाया।














































