लोकसभा चुनाव 2024 के बाद जौनपुर की राजनीति एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह बनी है सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वायरल एक पोस्ट, जिसने समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) की युवा सांसद प्रिया सरोज (Priya Saroj) को लेकर नई बहस छेड़ दी है। पोस्ट सामने आने के बाद पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है।
वायरल पोस्ट और सांसद की सक्रियता पर लगाए गए आरोप
हैलो आदरणीय अध्यक्ष जी @yadavakhilesh जी. यह हमारी चुनी हुई सांसद @PriyaSarojMP जी है.
मैने इनके लिए वोट मांगा है,लोगो से खूब अपील की थी चुनाव के समय,
इनके बाबू जी के लिए भी वोट मांगा था.लेकिन यह बाप बेटी एक भी काम नहीं किए हैं क्षेत्र में,
यह क्षेत्र में कभी नहीं रहती है,यह… pic.twitter.com/4GU7fyTWcf— Neeraj Kanojia (@NeerajKanojia16) May 9, 2026
वायरल पोस्ट में खुद को सपा समर्थक बताने वाले यूजर नीरज कन्नौजिया (@NeerajKanojia16) ने सांसद प्रिया सरोज की क्षेत्रीय उपस्थिति और जनसंपर्क को लेकर सवाल खड़े किए हैं। पोस्ट में दावा किया गया है कि चुनाव के दौरान उन्होंने और उनके परिवार ने प्रिया सरोज तथा उनके पिता के समर्थन में प्रचार किया था, लेकिन जीत के बाद सांसद क्षेत्र में अपेक्षित रूप से सक्रिय नहीं रहीं। आरोप में यह भी कहा गया है कि सांसद अधिकतर समय नोएडा और लखनऊ में बिताती हैं, जिससे स्थानीय कार्यकर्ता और समर्थक असंतुष्ट हैं।
भविष्य की राजनीति को लेकर दी गई चेतावनी

पोस्ट में यूजर ने यह भी लिखा कि यदि आगामी चुनाव में फिर से प्रिया सरोज या उनके परिवार को टिकट दिया गया, तो वह उनके खिलाफ प्रचार करेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अब वे अपनी बात से पीछे नहीं हटेंगे और लगातार अपनी राय सार्वजनिक करते रहेंगे।
सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं
पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कुछ लोगों ने यूजर के आरोपों का समर्थन किया, जबकि कई ने इसे व्यक्तिगत असंतोष या राजनीतिक मतभेद करार दिया। कुछ यूजर्स ने वीडियो साझा करते हुए सांसद के निजी जीवन और सार्वजनिक उपस्थिति पर भी टिप्पणी की, वहीं अन्य ने पार्टी के भीतर अनुशासन और संगठनात्मक एकजुटता पर जोर दिया।
पार्टी संगठन पर भी उठे सवाल
अंशु यादव नाम के एक अन्य यूजर ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं का लक्ष्य 2027 में अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाना है, लेकिन इसके लिए जनप्रतिनिधियों को जमीनी स्तर पर सक्रिय रहना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्रीय उपस्थिति को लेकर नाराजगी बढ़ रही है।
राजनीतिक संकेतों के तौर पर देखा जा रहा मामला
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह विवाद केवल सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि सपा के भीतर कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं और स्थानीय प्रतिनिधित्व को लेकर असंतोष का संकेत भी हो सकता है। प्रिया सरोज को पार्टी के युवा नेतृत्व के रूप में देखा जाता है, ऐसे में इस तरह की सार्वजनिक आलोचना को अहम माना जा रहा है।
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अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं
फिलहाल इस पूरे मामले पर न तो प्रिया सरोज और न ही समाजवादी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने आया है। हालांकि, सोशल मीडिया पर जारी बहस ने जौनपुर की राजनीति में नई हलचल जरूर पैदा कर दी है।












































