UP: लखनऊ नगर निगम (Lucknow Municipal Corporation) में ईंधन की बढ़ती खपत को कम करने के लिए महापौर सुषमा खर्कवाल (Sushma kharkwal) ने सख्त कदम उठाए हैं। उन्होंने अपने लिए आवंटित दो सरकारी वाहनों में से एक वाहन वापस कर दिया है। इसके साथ ही नगर निगम के उन अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं, जिन्हें दो-दो सरकारी गाड़ियां मिली हुई हैं, कि वे केवल एक वाहन का ही उपयोग करें। महापौर का कहना है कि सरकारी संसाधनों का जरूरत के अनुसार ही इस्तेमाल होना चाहिए।
अधिकारियों को सादगी अपनाने की सलाह
महापौर ने अधिकारियों से अपील की है कि वे सरकारी वाहनों का उपयोग कम से कम करें और अनावश्यक आवाजाही से बचें। उन्होंने सुझाव दिया कि अधिकारी दिन में घर जाकर भोजन करने के बजाय अपने साथ टिफिन लेकर आएं, ताकि ईंधन की बचत हो सके। इसके अलावा जिन कर्मचारियों या अधिकारियों को वाहन सुविधा का अधिकार नहीं है, उनसे सरकारी गाड़ियां वापस लेने के निर्देश भी दिए गए हैं।
नगर आयुक्त को भेजा गया पत्र
प्रधानमंत्री की ईंधन बचत संबंधी अपील के बाद महापौर ने यह पहल की है। उन्होंने नगर आयुक्त गौरव कुमार को पत्र लिखकर डीजल और पेट्रोल की खपत कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाने को कहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सफाई व्यवस्था और कूड़ा उठान जैसी जरूरी सेवाओं पर इसका असर नहीं पड़ना चाहिए, लेकिन अधिकारियों के वाहनों में होने वाली अतिरिक्त ईंधन खपत पर नियंत्रण जरूरी है।
नगर निगम में प्रतिदिन आठ हजार लीटर डीजल की खपत
नगर निगम में हर दिन करीब आठ हजार लीटर डीजल खर्च होता है। वहीं अधिकारियों के उपयोग के लिए लगभग 60 सरकारी वाहन आवंटित हैं। ऐसे में महापौर का मानना है कि यदि वाहन उपयोग में संयम बरता जाए तो बड़ी मात्रा में ईंधन की बचत संभव है। नगर निगम प्रशासन अब इस दिशा में नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रहा है।












































