‘ये देशद्रोह के बराबर है…’, राघव चड्ढा के पर बरसी डिंपल यादव

आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) के नेता और राज्यसभा सांसद Raghav Chadha ने भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) का दामन थाम लिया है। उन्होंने संवैधानिक प्रावधानों और नियमों का हवाला देते हुए दो-तिहाई सांसदों के समर्थन से अपना दल विलय कराया, जिसे (Rajya Sabha Secretariat) ने औपचारिक मान्यता भी दे दी है।

सात सांसदों को मिली नई पहचान

इस फैसले के बाद डॉ. अशोक कुमार मित्तल, राघव चड्ढा, हरभजन सिंह, डॉ. संदीप कुमार पाठक, डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी, स्वाति मालीवाल और राजिंदर गुप्ता को अब बीजेपी सांसदों की सूची में शामिल कर लिया गया है। यह बदलाव मौजूदा दल-बदल विरोधी कानून के तहत संभव हुआ, जिसमें दो-तिहाई सदस्यों के समर्थन से पार्टी विलय की अनुमति है।

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चार साल पुराना विधेयक बना चर्चा का विषय

दिलचस्प बात यह है कि वर्ष 2022 में मानसून सत्र के दौरान राघव चड्ढा ने खुद एक प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया था, जिसमें दल-बदल कानून को और सख्त बनाने की मांग की गई थी। प्रस्तावित संशोधन में पार्टी विलय के लिए आवश्यक संख्या दो-तिहाई से बढ़ाकर तीन-चौथाई करने, अयोग्य ठहराए गए जनप्रतिनिधियों को 6 साल तक चुनाव लड़ने से रोकने और व्हिप नियमों को सीमित करने जैसे प्रावधान शामिल थे।

‘हॉर्स ट्रेडिंग’ पर जताई थी चिंता

अपने विधेयक में राघव चड्ढा ने ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ और ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ को लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताया था। उनका कहना था कि मौजूदा कानून की खामियों के कारण जनप्रतिनिधि जनता के जनादेश के विपरीत जाकर राजनीतिक लाभ उठाते हैं। हालांकि, वर्तमान घटनाक्रम में उन्होंने इसी मौजूदा कानून के तहत बीजेपी में विलय किया है, जिससे राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।

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