पीएम मोदी की देशवासियों से सोने की खरीद टालने और पेट्रोलियम पदार्थों का सीमित उपयोग करने की अपील पर मायावती ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह अपील देश के सामने गहराते आर्थिक और ऊर्जा संकट की ओर इशारा करती है।
मायावती का एक्स पोस्ट
अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध जारी युद्ध समाप्ति की अनिश्चितता के कारण ख़ासकर ऊर्जा संकट व विदेशी मुद्रा भण्डार की चिन्ताओं के मद्देनज़र मा. प्रधानमंत्री द्वारा देश के लोगों से ’संयम’ बरतने की गयी अपीलों से यह साबित है कि भारत के समक्ष संकट केवल पेट्रोल, डीज़ल, रसोई…
— Mayawati (@Mayawati) May 12, 2026
बसपा प्रमुख ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी अपने बयान में कहा कि अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध जारी युद्ध समाप्ति की अनिश्चितता के कारण ख़ासकर ऊर्जा संकट व विदेशी मुद्रा भण्डार की चिन्ताओं के मद्देनज़र मा. प्रधानमंत्री द्वारा देश के लोगों से ’संयम’ बरतने की गयी अपीलों से यह साबित है कि भारत के समक्ष संकट केवल पेट्रोल, डीज़ल, रसोई गैस आदि पेट्रोलियम पदार्थों को लेकर ही नहीं बल्कि आर्थिक संकट भी गहरायेगा, जिससे करोड़ों भारतवासियों का जीवन प्रभावित हो रहा है तथा जिसके जारी रहने की भी गंभीर आशंका है। अर्थात् ऐसे समय में जबकि कोरोनाकाल की ज़बरदस्त मार के बाद रोज़ी-रोटी तक के संकट का जीवन झेल रही देश की लगभग सौ करोड़ जनता के पास और अधिक संयमित होने व खोने को कुछ ख़ास नहीं बचा है, तो ऐसी स्थिति में केन्द्र एवं राज्य सरकारें उन ग़रीब व मेहनतकश परिवारों को थोड़ी राहत देकर उनका सहारा बनने के लिये ख़ुद ही कुछ बेहतर करने का उपाय ज़रूर करें तो यह जन व देशहित में उचित होगा, ऐसी आम जन भावना।
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आम जनता पर बढ़ते आर्थिक दबाव का जिक्र
मायावती ने कहा कि देश की बड़ी आबादी पहले से ही कोरोना महामारी के बाद रोजगार और आजीविका के संकट से जूझ रही है। उनके अनुसार करोड़ों गरीब और मेहनतकश परिवारों के पास अब अतिरिक्त आर्थिक बोझ सहने की क्षमता नहीं बची है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान हालात में आम जनता से केवल संयम बरतने की अपेक्षा करना पर्याप्त नहीं होगा।
सरकारों से राहत पैकेज की मांग
बसपा सुप्रीमो ने केंद्र और राज्य सरकारों से मांग की कि वे गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों को राहत प्रदान करें। उन्होंने कहा कि कठिन आर्थिक परिस्थितियों में सरकारों को आम लोगों का सहारा बनना चाहिए, ताकि जनता पर बढ़ते संकट का असर कम किया जा सके। उन्होंने इसे जनहित और देशहित में जरूरी कदम बताया।












































