UP: उत्तर प्रदेश की राजनीति में योगी सरकार के हालिया कैबिनेट विस्तार के बाद अब विभागों के बंटवारे को लेकर हलचल तेज हो गई है। 10 मई को शपथ लेने वाले छह नए मंत्रियों और दो प्रमोट किए गए राज्य मंत्रियों को अभी तक विभाग नहीं सौंपे गए हैं। इस देरी ने सत्ता गलियारों में चर्चाओं को और गर्म कर दिया है। कई मंत्री दिल्ली में सक्रिय होकर अपने लिए प्रभावशाली मंत्रालय पाने की कोशिश में जुटे बताए जा रहे हैं।
जातीय और सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति
बीजेपी ने इस विस्तार के जरिए आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए सामाजिक संतुलन बनाने की कोशिश की है। नए मंत्रियों में दलित और ओबीसी वर्ग को प्रमुखता दी गई है, जबकि एक ब्राह्मण चेहरे को भी जगह दी गई। पार्टी अब इन नेताओं को केवल प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उन्हें मजबूत विभाग देकर राजनीतिक संदेश देने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि विभागों का बंटवारा भी इसी सामाजिक समीकरण को ध्यान में रखकर किया जाएगा।
Also Read: ‘6 नए मंत्रियों की एंट्री, दो मंत्रियों का बढ़ा कद…’, यूपी में योगी कैबिनेट विस्तार
दिल्ली दौरे के राजनीतिक संकेत
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दिल्ली दौरा भी राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। उन्होंने अमित शाह और नितिन नवीन से मुलाकात की, जिसके बाद राजनीतिक अटकलें और तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि इन बैठकों में कैबिनेट विस्तार के बाद विभागों के वितरण, संगठनात्मक बदलाव और आगामी रणनीति पर चर्चा हुई है। पार्टी नेतृत्व प्रदेश सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
पीडब्ल्यूडी विभाग को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा
लोक निर्माण विभाग यानी पीडब्ल्यूडी को लेकर सबसे ज्यादा राजनीतिक चर्चा हो रही है। 2024 में जितिन प्रसाद के केंद्र सरकार में जाने के बाद यह विभाग फिलहाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास है। अब सवाल उठ रहा है कि क्या यह जिम्मेदारी भूपेंद्र चौधरी को दी जाएगी या फिर केशव प्रसाद मौर्य को दोबारा यह विभाग मिल सकता है। वहीं, सपा से भाजपा में आए मनोज पांडेय को भी कैबिनेट मंत्री बनाया गया है, जिसके चलते उन्हें भी महत्वपूर्ण मंत्रालय मिलने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल सभी की नजरें विभागों के अंतिम बंटवारे पर टिकी हुई हैं।














































