नोएडा। नोएडा पुलिस कमिश्नर आईपीएस अधिकारी लक्ष्मी सिंह के पिता इंद्रदेव सिंह की हत्या के मामले में 24 साल बाद कोर्ट ने फैसला सुना दिया है। तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया गया है। 6 जुलाई को इनकी सजा का ऐलान किया जाएगा।
मामला क्या था?
सोमेरा गांव में पांच बीघा जमीन को लेकर विवाद था। इसी जमीन के झगड़े में इंद्रदेव सिंह की लखपाल और अन्य आरोपियों ने मिलकर हत्या की साजिश रची थी। इंद्रदेव सिंह परिवार के साथ खरीदारी करने जा रहे थे, इसी दौरान रेकी कर हत्यारों ने उन पर गोली मार दी।
फैसला और आरोपियों के नाम
नोएडा कोर्ट ने मुख्य आरोपियों शूटेर विक्रम कालिया, दोशी पन्ना सिंह और दोशी ब्रजेश यादव को दोषी करार दिया है। अदालत ने लंबी सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। तीनों आरोपी लंबे समय से जेल में थे।
24 साल बाद आया न्याय
इंद्रदेव सिंह की हत्या 2 अगस्त 2002 को हुई थी। उनके बेटे और बेटी (लक्ष्मी सिंह) ने लगातार न्याय की लड़ाई लड़ी। इस मामले में कुल पांच आरोपी थे, जिनमें से तीन को अब दोषी ठहराया गया है।
अगस्त 2003 में इस मामले में चार्जशीट दाखिल की गई थी, लेकिन न्याय मिलने में पूरे 24 साल लग गए।
घटना का विवरण
घटना के दिन इंद्रदेव सिंह परिवार के साथ खरीदारी करने निकले थे। लखपाल और उसके साथियों ने पहले से साजिश रच रखी थी। स्कूटर पर बैठे शूटर विक्रम कालिया ने उन पर गोली चलाई। गोली लगने के बाद इंद्रदेव सिंह की मौके पर ही मौत हो गई।
आईपीएस अधिकारी लक्ष्मी सिंह पर क्या असर?
लक्ष्मी सिंह उस समय युवा थीं। पिता की हत्या के बाद उन्होंने न केवल आईपीएस बनकर देश सेवा की, बल्कि लगातार इस मामले की सुनवाई पर नजर रखी। 24 साल बाद फैसला आने पर उन्होंने न्याय व्यवस्था पर भरोसा जताया है, हालांकि कई लोगों ने इस मामले में न्याय व्यवस्था की गति पर सवाल भी उठाए हैं।
अब क्या होगा?
6 जुलाई 2026 को कोर्ट तीनों दोषियों की सजा का ऐलान करेगा। इस फैसले को परिवार के लिए न्याय की जीत माना जा रहा है, हालांकि इसमें दो दशक से ज्यादा का समय लग गया। यह मामला जमीन विवाद, लखपाल की मिलीभगत और हत्या की साजिश को लेकर लंबे समय से चर्चा में रहा है। फैसले के बाद अब परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद है।
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