UP: अमेठी में डॉक्टर मरीज की बीमारी की पहचान कर उचित परामर्श देते हैं, लेकिन चिकित्सक के परामर्श के अनुसार दवा उपलब्ध कराने और उसके सेवन की सही जानकारी देने में फार्मासिस्ट की भूमिका अहम होती है। इसके बावजूद जिले के सरकारी अस्पतालों में फार्मासिस्टों की कमी बनी हुई है। पदों के सृजन के सापेक्ष पर्याप्त तैनाती न होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गांवों में आज भी आम फार्मासिस्ट को लोग ‘कंपाउंडर साहब’ कहकर बुलाते हैं। कौन सी दवा कितनी मात्रा में और कब लेनी है, इसकी जानकारी देने की जिम्मेदारी भी फार्मासिस्ट की होती है। फार्मेसी नियमों के अनुसार दवाओं के रखरखाव, वितरण, मरीजों की काउंसिलिंग और आपातकालीन सेवाओं में भी फार्मासिस्ट की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
पद 70, तैनाती 53
जिले के सीएचसी, पीएचसी, जिला अस्पताल और रेफरल अस्पतालों में फार्मासिस्ट के कुल 70 पद सृजित हैं, जबकि वर्तमान में 53 फार्मासिस्ट ही कार्यरत बताए जा रहे हैं। ऐसे में मरीजों की बढ़ती संख्या के अनुपात में फार्मासिस्टों की कमी साफ नजर आ रही है।
जिला अस्पताल में छह फार्मासिस्ट
जिला अस्पताल में छह फार्मासिस्ट और दो चीफ फार्मासिस्ट के पद सृजित हैं। यहां छह फार्मासिस्ट कार्यरत हैं। अस्पताल में प्रतिदिन करीब एक हजार से 1500 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। दवा काउंटर पर भीड़ बनी रहती है। कई बार फार्मेसी के छात्र भी दवा वितरण में सहयोग करते हैं। सीएमएस डॉ. बीपी अग्रवाल ने बताया कि फार्मासिस्टों की संख्या बढ़ाने के लिए पत्र भेजा गया है।
मेडिकल स्टोरों पर भी निगरानी की जरूरत
वहीं, जिले में कई मेडिकल स्टोरों पर लाइसेंस किसी अन्य व्यक्ति के नाम होने और संचालन दूसरे लोगों द्वारा किए जाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। ऐसे में दवा वितरण के लिए प्रशिक्षित फार्मासिस्ट की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ ही मेडिकल स्टोरों पर भी संबंधित विभाग की ओर से नियमित निगरानी की जरूरत है।














