गोरखपुर : दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में यूजीसी-मालवीय मिशन टीचर्स ट्रेनिंग सेंटर (MMTTC) और व्यवसाय प्रशासन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे सात दिवसीय ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम के तीसरे दिन शोध में पुस्तक समीक्षा, पेपर रिजेक्शन, केस स्टडी और टॉप जर्नल्स में प्रकाशन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। कार्यक्रम में 177 से अधिक शिक्षक एवं शोधार्थियों ने भाग लिया।
प्रथम सत्र
इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज के डॉ. सुमित सौरभ श्रीवास्तव ने “रिसर्च में बुक रिव्यू की भूमिका” विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने शोध कार्य में पुस्तक समीक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला और प्रतिभागियों को अकादमिक दृष्टिकोण से समृद्ध किया।
द्वितीय सत्र
आईआईटी दिल्ली के डॉ. विवेक मिश्रा ने “पोस्ट राइटिंग स्ट्रगल्स, रिजेक्शन एवं रिवीजन” पर व्याख्यान दिया। डॉ. मिश्रा ने कहा कि शोध पत्र की अस्वीकृति या संशोधन असफलता नहीं, बल्कि सही दिशा की ओर मील के पत्थर हैं। उनका यह सत्र शोधार्थियों के लिए बेहद प्रेरणादायी रहा।
तृतीय सत्र
एचबीटीयू कानपुर की प्रो. प्रियंका गुप्ता ने “केस स्टडी एज ए टीचिंग टूल” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने केस स्टडी के वैज्ञानिक आधार — न्यूरल कपलिंग, डोपामाइन रिलीज, मिरर न्यूरॉन एक्टिविटी और कॉर्टेक्स एक्टिवेशन — को सरल भाषा में समझाया। सत्र अत्यंत व्यावहारिक और रोचक रहा।
चतुर्थ सत्र
सीएसएमयू, नवी मुंबई के प्रो. भवेश कुमार एन. पासी ने “टॉप क्वार्टाइल जर्नल्स हेतु रिसर्च पेपर लेखन” पर अंतिम सत्र लिया। उन्होंने प्रकाशन की प्रक्रिया, नैतिकता, लेखक-पाठक अंतर और जर्नल गाइडलाइंस पढ़ने की सलाह दी।
कार्यक्रम के समापन पर डॉ. मोहम्मद इरफान ने सभी वक्ताओं, अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में 177 से अधिक शिक्षक और शोधार्थी सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। कार्यक्रम के शेष दिनों में भी रिसर्च से जुड़े महत्वपूर्ण टॉपिक्स पर विशेषज्ञ व्याख्यान प्रस्तुत किए जाएंगे। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों और शोधार्थियों की गुणवत्ता बढ़ाने तथा उन्हें आधुनिक डिजिटल टूल्स से परिचित कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।










































