गुरुग्राम : गुरुग्राम के एक दंपति राहुल राठौर और मीनू राठौर ने IVF प्रक्रिया के जरिए जुड़वां बेटियों को जन्म दिया, लेकिन DNA टेस्ट की रिपोर्ट ने उनके जीवन को उलट-पुलट कर दिया। रिपोर्ट में दोनों बच्चियों का न तो माता से और न ही पिता से कोई जैविक संबंध मिला। एक बच्ची के चेहरे के फीचर्स पर शक होने के बाद कराए गए टेस्ट ने बड़े घोटाले की आशंका जता दी है। मामला अब अदालत पहुंच चुका है और परिवार अपने असली बच्चों की तलाश में प्रशासन से मदद मांग रहा है।
IVF प्रक्रिया और जन्म की खुशी
राहुल राठौर और उनकी पत्नी मीनू ने पिछले साल गुरुग्राम/दिल्ली के प्रसिद्ध SCI IVF सेंटर में इलाज शुरू कराया। डॉक्टरों की सलाह पर पूरी मेडिकल प्रक्रिया पूरी की गई। 14 मार्च 2025 को भ्रूण महिला के गर्भ में ट्रांसफर किए गए। इस साल 5 जनवरी 2026 को मीनू राठौर ने द्वारका के मैक्स अस्पताल में जुड़वां बेटियों को जन्म दिया। परिवार में खुशी का माहौल था, लेकिन जल्द ही एक बच्ची के चेहरे के नैन-नक्श परिवार से अलग दिखने पर शक हुआ।
चेहरे पर शक, फिर DNA टेस्ट
दोनों बच्चियों में से छोटी बेटी का चेहरा माता-पिता या परिवार के किसी सदस्य से नहीं मिल रहा था। नैन-नक्श पूर्वोत्तर भारत के लोगों जैसे प्रतीत हो रहे थे। शक बढ़ने पर दंपति ने दोनों बच्चों का DNA टेस्ट कराया। रिपोर्ट आने पर दंपति के पैरों तले जमीन खिसक गई — दोनों बच्चियों का DNA न तो राहुल राठौर से मैच हुआ और न ही मीनू राठौर से।
पुलिस और अदालत का रुख
राहुल राठौर ने तुरंत पुलिस और प्रशासन से शिकायत की, लेकिन शुरुआती तीन महीनों तक कोई FIR दर्ज नहीं हुई। थक-हारकर दंपति कोर्ट पहुंचा। अदालत के हस्तक्षेप के बाद 31 मार्च 2026 को FIR दर्ज की गई। इसके अगले दिन जांच पर स्टे लग गया, जिससे मामला लटक गया। 5 जून को कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए पुलिस को IVF सेंटर से सभी रिकॉर्ड और दस्तावेज जब्त करने के आदेश दिए। दंपति का कहना है कि अब पुलिस का रवैया थोड़ा बदला है, लेकिन अभी तक पूरे कागजात जब्त नहीं किए गए।
मां का दर्द और परिवार की पीड़ा
मीनू राठौर ने Media से बातचीत में रोते हुए बताया कि यह उनकी तीसरी सिजेरियन डिलीवरी थी। शरीर में इतना दर्द सहने के बावजूद डिलीवरी के कुछ दिन बाद ही उन्हें पुलिस स्टेशन बुलाया गया, जहां घंटों इंतजार करना पड़ा। उन्होंने सवाल उठाया — “मैंने गर्भ धारण किया, बच्चों को जन्म दिया, लेकिन वे हमारे नहीं हैं। इन मासूम बच्चों का क्या कसूर है? हमारी हाथ जोड़कर विनती है कि प्रशासन हमारे असली बच्चों को ढूंढकर लाए।”
IVF सेंटर पर आरोप, जांच जारी
दंपति का आरोप है कि IVF सेंटर से संपर्क करने पर उनकी बात नहीं सुनी गई, बल्कि उन पर ही सवाल उठाए गए। संभावना जताई जा रही है कि या तो भ्रूण की अदला-बदली हुई या जन्म के बाद बच्चियों की स्वैपिंग हुई। क्लिनिक की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ और आगे की राह
यह मामला IVF प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। दंपति अब अन्य मरीजों से अपील कर रहा है कि जिन्होंने 2025 में SCI IVF सेंटर से इलाज कराया, खासकर जुड़वां बच्चों वाले माता-पिता DNA टेस्ट कराएं। पुलिस जांच जारी है और दिल्ली सरकार के ART अथॉरिटी ने भी मामले में संज्ञान लिया है।
परिवार अभी भी उन दो बच्चों को प्यार से पाल रहा है, लेकिन मन में सवाल बरकरार है — हमारे असली बच्चे कहां हैं?यह घटना IVF सेंटर्स के लिए चेतावनी बन सकती है कि लापरवाही की कितनी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।











































