अयोध्या में गैर विवादित भूमि पर अर्जी के फैसलें को मायावती ने बताया ‘संकीर्ण सोच वाला विवादित कदम’

मोदी सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर कर अयोध्या में गैर विवादित भूमि राम जन्मभूमि न्यास को देने के फैसले पर बसपा सुप्रीमों मायावती ने जमकर हमला बोला है. बसपा चीफ ने मोदी सरकार के इस फैसले को संकीर्ण सोच वाला विवादित कदम बताया है.


मायावती ने कहा भाजपा सरकार का अयोध्या भूमि विवाद के संबंध में अधिग्रहित भूमि का भूभाग राम जन्मभूमि न्यास को वापस लौटाने हेतु माननीय सुप्रीम कोर्ट में अर्जी देने की कल की कार्यवाही भी जबरदस्ती सरकारी हस्तक्षेप के साथ-साथ लोकसभा आम चुनाव से पूर्व चुनाव को प्रभावित करने की नीयत वाला ऐसा ही संकीर्ण सोच का विवादित कदम है. जिसे देश की आम जनता को बहुत ही सावधान रहने की जरूरत है.


बसपा चीफ ने कहा कि वैसे भी माननीय सुप्रीम कोर्ट की मल्कियत वाली अधिग्रहित भूमि में यथास्थिति को बिगाड़ने का सरकारी प्रयास अनुचित व भड़काऊ भी है. घोर चुनावी स्वार्थ की राजनीति के तहत यह बीजेपी सरकार का नया चुनावी हथकंडा है.


मायावती ने कहा कि देश में जबरदस्त गरीबी, महंगाई, बेरोजगारी है. व्यापक जनहित से जुड़े मुद्दे, समस्याओं तथा विकास के मामले में बुरी तरह असफलताओं के साथ इनकी घोर चुनावी वादाखिलाफी के कारण देश की सवा सौ करोड़ आम जनता का विश्वास खोकर बदनाम हो चुकी बीजेपी सरकार के पास अब आयोध्या व धर्म के अन्य मामलों का गलत व राजनीतिक इस्तेमाल आखिरी हथकंडा बाकी रह गया था, जिसे बीजेपी अब पूरी तरह से इस्तेमल करने में लग गई है.


बसपा सुप्रीमों ने कहा कि इनकी इसी प्रकार की राजनीति से देश की जनता बुरी तरह से पीड़ित, प्रताड़ित व त्रस्त है. लेकिन बीजेपी को अभी भी लगता है कि यही अब इनके पास आखिरी हथकंडा मात्र बचा है और वह इस प्रकरण में तरह-तरह से हाथ-पांव मारने में लगी हुई है. जिसमें आम जनहित और देशहित बिल्कुल भी निहित नहीं है. वैसे बीजेपी को लग गया है कि सत्ता में दोबारा वापस आने वाली नहीं है इससे भी घबराकर बौखलाहट में केंद्र, उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार व सभी हथकंडे इस्तेमाल करने में लग गई है, जिसकी उम्मीद संविधान के आधार पर चलने वाली किसी भी निर्वाचित सरकार से देश की आम जनता कतई नहीं कर सकती है.


मायावती ने कहा बीजेपी सरकार का कल का माननीय सुप्रीम कोर्ट में उठाया गया कदम ऐसा ही एक गलत सरकारी हस्तक्षेप वाला गैर संवैधानिक कदम है, जिसमें संकीर्ण राष्ट्रवाद साफतौर पर उसी प्रकार से निहित है. जिस प्रकार से इसके अन्य फैसलों व खासकर के नागरिक संशोधन विधेयक में समाहित है. जिसके खिलाफ बीजेपी शासित असम राज्य सहित पूरे पूर्वोत्तर भारत के प्रदेशों में वहां की आम जनता काफी आंदोलित है, तथा सड़कों पर संघर्षरत है, और बीजेपी सरकार जिनको देशद्रोही बताकर उनके संघर्ष को कुचलने का हर प्रकार से अलोकतांत्रिक प्रयास कर रही है.


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