फर्रुखाबाद : फर्रुखाबाद शहर के बीचों-बीच स्थित दिल्ली ख्याली कुँचा मोहल्ले में नगर पालिका की व्यवस्थाओं की पोल उस समय खुल गई, जब पिछले करीब 48 घंटे से गली में भरा गंदा पानी लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बना हुआ है। जलभराव के चलते एक दर्जन से अधिक परिवार अपने ही घरों में कैद होकर रह गए हैं। मोहल्लेवासियों का आरोप है कि कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद नगर पालिका का कोई अधिकारी या कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा है।
मोहल्ले की संकरी गली में जमा पानी ने सड़क का स्वरूप पूरी तरह बदल दिया है। स्थिति यह है कि लोगों को घरों से निकलने और वापस पहुंचने के लिए गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। वायरल हो रही तस्वीरों में साफ दिखाई दे रहा है कि पूरी गली कई फीट तक पानी में डूबी हुई है और दोपहिया वाहन चालक भी मुश्किल से रास्ता पार कर पा रहे हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण थोड़ी सी बारिश या नालियों के अवरुद्ध होने पर पूरा मोहल्ला तालाब में तब्दील हो जाता है। पिछले दो दिनों से हालात और भी बदतर बने हुए हैं। गंदे पानी के कारण दुर्गंध फैल रही है तथा मच्छरों का प्रकोप बढ़ने लगा है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा भी मंडराने लगा है।
मोहल्ले के लोगों ने बताया कि बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई घरों के सामने पानी भर जाने से दैनिक कार्य प्रभावित हो गए हैं। लोगों का आरोप है कि नगर पालिका प्रशासन को कई बार समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
आक्रोशित नागरिकों ने अपनी पीड़ा सोशल मीडिया के माध्यम से उजागर करनी शुरू कर दी है। जलभराव की तस्वीरें और वीडियो लगातार सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें नगर पालिका की सफाई और जल निकासी व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब शहर के मुख्य इलाके का यह हाल है तो अन्य मोहल्लों की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और नगर पालिका के उच्च अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप कर जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द पानी की निकासी नहीं कराई गई तो बीमारी फैलने की आशंका के साथ-साथ लोगों का जनजीवन और अधिक प्रभावित हो जाएगा। फिलहाल दिल्ली ख्याली कुँचा मोहल्ले की तस्वीरें नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं और जिम्मेदार अधिकारियों की संवेदनशीलता पर भी प्रश्नचिह्न लगा रही हैं।














































