डीएम सुनती रहीं जनता का दर्द, कूलर की ठंडी हवा में खर्राटे मारते रहे डीपीआरओ साहब

रायबरेली। वाह साहब वाह! इसे कहते हैं ‘काम का काम, और आराम का आराम’। सरकारी तंत्र में जिम्मेदारी और संवेदनशीलता की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले हुक्मरानों की हकीकत देखनी हो, तो जरा महराजगंज तहसील के ‘सम्पूर्ण समाधान दिवस’ का नजारा देख लीजिए। जहां एक तरफ जिले की मुखिया यानी जिलाधिकारी (डीएम) सरनीत कौर ब्रोका पसीने से तर-बतर होकर आम जनता की फरियाद सुन रही थीं, वहीं दूसरी तरफ जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) सौम्यशील सिंह अपनी कुर्सी को ही ‘बेड’ समझकर कूलर की ठंडी हवा में गहरी नींद के खर्राटे भर रहे थे।

​3 दिन पहले बने थे ‘हीरो’, अब सोशल मीडिया पर ‘जीरो’!

​अभी ठीक तीन दिन पहले, यानी 13 मई को यही डीपीआरओ साहब पेट्रोल-डीजल बचाने और पर्यावरण संरक्षण का ढोल पीटते हुए अपने सरकारी आवास से विकास भवन तक साइकिल चलाकर आए थे। तब कैमरों के सामने खूब तस्वीरें खिंचवाई गईं और सुर्खियां बटोरी गईं। लेकिन शायद साहब को क्या पता था कि साइकिल चलाने की वह ‘थकान’ तीन दिन बाद जनता के सामने इस कदर निकलेगी! तहसील सभागार में फरियादी अपनी फटी किस्मत और समस्याओं की पोटली लेकर न्याय की गुहार लगा रहे थे, और डीपीआरओ साहब सपनों की दुनिया में सैर कर रहे थे।

​जनता ने कसा तंज: ‘साइकिल चलाने की थकान अब उतार रहे हैं साहब’

​समाधान दिवस जैसे गंभीर मंच पर अधिकारी की इस ‘कुंभकर्णी’ नींद को देखकर मौके पर मौजूद लोग दंग रह गए। फरियाद लेकर आए ग्रामीणों ने जब यह नजारा देखा तो चटखारे लेते हुए तंज कसा कि लगता है साहब ने तीन दिन पहले जो साइकिल चलाई थी, उसकी असली थकान आज जनता के बीच बैठकर ही उतारी जा रही है।
​देखते ही देखते किसी ने साहब की इस ‘शांतिपूर्ण’ नींद का वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल हो रहा है।

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बड़े सवाल: क्या सिर्फ फोटो खिंचवाने तक सीमित हैं अफसर?

​इस वायरल वीडियो ने योगी सरकार के ‘जवाबदेह और संवेदनशील प्रशासन’ के दावों की हवा निकाल दी है। अब लोग सोशल मीडिया पर सीधे सवाल दाग रहे हैं कि ​क्या जनता की समस्याएं सुनना अधिकारियों के लिए महज एक औपचारिकता (कोरम पूरा करना) रह गया है?
​क्या कुछ अफसर सिर्फ पब्लिसिटी स्टंट और फोटो खिंचवाने के लिए ही ‘एक्टिव’ दिखते हैं?
​जब वीआईपी कार्यक्रम (समाधान दिवस) में अफसरों की बेपरवाही का यह आलम है, तो आम दिनों में दफ्तरों से जनता को कितनी दुत्कार मिलती होगी?


अब देखना दिलचस्प होगा…

साइकिल चलाकर ‘वाहवाही’ लूटने वाले डीपीआरओ साहब की इस ‘नींद’ पर जिले की डीएम साहिबा कितनी तल्ख होती हैं और इस बढ़ते जनाक्रोश के बाद प्रशासन साहब की ‘नींद’ तोड़ने के लिए क्या एक्शन लेता है!

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