UP: मुजफ्फरनगर में 2013 के दंगे की याद दिलाने वाले होर्डिंग से हड़कंप, रातों-रात सड़कों पर लगाए गए विवादित पोस्टर

UP:  शहर में एक बार फिर 2013 के सांप्रदायिक दंगों की याद ताजा कराने वाले होर्डिंग सामने आने से हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि रात के अंधेरे में सड़कों के किनारे अचानक कई होर्डिंग लगाए गए। सुबह जब लोगों की नजर इन होर्डिंग पर पड़ी तो इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।होर्डिंग पर बड़े अक्षरों में लिखा गया— “न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे”। इसके साथ ही होर्डिंग में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को डांस देखते हुए दिखाया गया है। विवादित होर्डिंग सामने आने के बाद स्थानीय लोगों के बीच इसे लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया।

जानिए क्या है पूरा मामला?

लोगों का कहना है कि इन होर्डिंग के जरिए वर्ष 2013 में मुजफ्फरनगर में हुए सांप्रदायिक दंगों की याद दिलाने की कोशिश की गई है। 2013 के दंगों के दौरान मुजफ्फरनगर और आसपास के इलाकों में बड़े स्तर पर हिंसा हुई थी। इस हिंसा में 60 से अधिक लोगों की जान गई थी, जबकि बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए और कई परिवारों को अपना घर छोड़कर राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी थी।

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इधर, रातों-रात लगाए गए इन होर्डिंग को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर इन्हें किसने लगवाया और इसके पीछे मकसद क्या था? फिलहाल होर्डिंग लगवाने वाले व्यक्ति या संगठन की स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।मामले की जानकारी मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस सक्रिय हुई और विवादित होर्डिंग/पोस्टर को मौके से हटवा दिया गया। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि रात के समय इन होर्डिंग को किसने लगाया था और इसके पीछे किसकी भूमिका है। होर्डिंग में राजनीतिक संदेश के साथ 2013 की हिंसा का संदर्भ होने के चलते मामला और भी संवेदनशील माना जा रहा है। स्थानीय लोगों के बीच इस बात को लेकर चर्चा है कि क्या यह महज राजनीतिक पोस्टर है या फिर इसके पीछे किसी तरह की राजनीतिक या सामाजिक रणनीति है।फिलहाल पुलिस की कार्रवाई और जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि इन विवादित होर्डिंग को किसने लगवाया और आखिर इसके पीछे वास्तविक मंशा क्या थी।

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