इटावा: बकरी बाजार में बकरी बिके या न बिके, ₹50 का हिसाब जरूर बनता दिख रहा है। बुधवार को महज ₹50 शुल्क को लेकर हुए विवाद ने बाजार प्रशासन की शुल्क वसूली व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोग पूछ रहे हैं कि आखिर बकरी बेचने आया पशुपालक बकरी बेच ही नहीं पाया तो शुल्क किस बात का?
मैनपुरी के महालरपुर निवासी सीटू सिंह का आरोप है कि वह बकरी बेचने जसवंतनगर बाजार पहुंचे थे, लेकिन बकरी नहीं बिकी। इसके बावजूद उनसे ₹50 शुल्क मांगा गया। शुल्क देने से इनकार करने पर कहासुनी बढ़ने का आरोप है।
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सीटू सिंह का आरोप है कि उसकी बकरी को बाजार कर्मचारियों ने वहीं बांध लिया। मोबाइल से वीडियो बनाने पर मोबाइल छीनने और तोड़ने का प्रयास किया गया। पशुपालक ने अभद्रता, गाली-गलौज और थप्पड़ मारने की धमकी के भी आरोप लगाए हैं।
अब सवाल बाजार प्रशासन से है- ₹50 की वसूली का नियम क्या है? क्या बकरी के बिकने या न बिकने से शुल्क का कोई संबंध नहीं है? हर पशुपालक को शुल्क की रसीद दी जाती है या नहीं? अगर नियम स्पष्ट है तो उसे सार्वजनिक करने में परेशानी क्या है?
वायरल वीडियो के बाद बाजार की व्यवस्था पर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सवाल छोटा जरूर है, लेकिन जवाब बाजार प्रशासन को देना होगा कि ₹50 की यह वसूली आखिर किस नियम-कायदे के तहत हो रही थी।
हालांकि वीडियो और पशुपालक के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। शुल्क व्यवस्था और विवाद की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।



















































