रैपर से प्रधानमंत्री तक का सफर! बालेन शाह बदल देंगे नेपाल की राजनीति?

नेपाल के आम चुनाव में वोटों की गिनती अभी जारी है, लेकिन रैपर से नेता बने बालेन शाह शुरुआती रुझानों में निर्णायक बढ़त लेते दिख रहे हैं. इससे यह संकेत मिल रहा है कि वो देश के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं.जनवरी तक राजधानी काठमांडू के मेयर रहे शाह का, गुरुवार को हुए आम चुनावों में कई बड़े नेताओं से मुक़ाबला था. इनमें नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री केपी ओली और नेपाली कांग्रेस के गगन थापा भी शामिल हैं.बालेन शाह की पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) 165 प्रत्यक्ष निर्वाचित सीटों में से दो-तिहाई से ज़्यादा सीटों पर आगे चल रही है. नेपाली कांग्रेस दूसरे स्थान पर काफी पीछे है, जबकि यूएमएल तीसरे स्थान पर है।

अब इन सब के बीच में ये जानना बेहद जरूरी हो जाता है की आखिर ये बालेन शाह है कौन 35 साल के बालेन शाह ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है और कई साल से नेपाल के हिप-हॉप संगीत जगत ‘नेफहॉप’ से जुड़े रहे हैं.एक रिपोर्ट के मुताबिक़, बालेन शाह मई 2022 में जब पहली बार नेपाल की राजधानी काठमांडू के मेयर बने तो यह सबके लिए चौंकाने वाला था. बालेन शाह लोकप्रिय रैपर थे और जब उन्होंने काठमांडू के मेयर चुनाव में ख़ुद को उतारा तभी से उनका नाम चर्चा में आया.बालेन शाह का जन्म काठमांडू के गैर गाउन में 1990 में हुआ था. बालेन के पिता राम नारायण शाह आयुर्वेद के डॉक्टर हैं और इनकी माँ का नाम ध्रुवदेवी शाह है. नेपाल के अख़बार माई रिपबल्किा के अनुसार, बालेन बचपन से संगीत प्रेमी थे और टोपियों के शौकीन थे।

इनकी पहचान स्ट्रक्चरल इंजीनियर, रैपर, एक्टर, म्यूजिक प्रॉड्यूसर, गीतकार और एक कवि की रही है.पिछले साल नेपाल में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ शुरू हुए जेन जी के प्रदर्शनों के दौरान युवाओं के बीच बालेन शाह की लोकप्रियता और बढ़ गई.इन विरोध प्रदर्शनों में 77 लोगों की मौत हुई, जिनमें कई प्रदर्शनकारी थे जिन्हें पुलिस की गोली लगी.इसके बाद उस समय के नेता केपी ओली को पद छोड़ना पड़ा था. हालांकि 74 साल के ओली इस चुनाव में फिर मैदान में हैं और उन्होंने जीत का भरोसा जताया है.बालेन शाह ने उन प्रदर्शनों का समर्थन किया था और एक समय उन्होंने केपी ओली को “आतंकवादी” तक कहा था, साथ में ये भी कहा था केपी ओली ने अपने देश के साथ विश्वासघात किया है. साह के इन बयानों के कारण कुछ लोगों का मानना है कि वे देश का नेतृत्व करने लायक नहीं हैं।

तो कुछ लोगों का मानना है देश का नेतृत्व करने लायक है फिलहाल जिस बालेन शाह की हम बात कर रहे है उनकी पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी यानी RSP का इतिहास क्या है नेपाल में लंबे समय से राजनीति पर पारंपरिक दलों का दबदबा रहा है, जैसे Nepali Congress, Communist Party of Nepal और Communist Party of Nepal इन दलों के खिलाफ जनता में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और राजनीतिक अस्थिरता को लेकर असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा था। इस माहौल को देखते हुए जून 2022 में प्रसिद्ध टीवी पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता रबी लामिछाने ने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) की स्थापना की। पार्टी का मुख्य उद्देश्य था –भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त लड़ाई,..पारदर्शी शासन नई पीढ़ी को राजनीति में लाना पारंपरिक दलों के विकल्प के रूप में नई राजनीति स्थापित करना बता दे पार्टी बनने के कुछ ही महीनों बाद 2022 में नेपाल में संसदीय चुनाव हुए।

आम तौर पर नई पार्टियों को मजबूत बनने में कई साल लगते हैं, लेकिन RSP ने बहुत कम समय में ही जनता के बीच बड़ी लोकप्रियता हासिल कर ली। 2022 के संसदीय चुनाव में पार्टी ने 20 सीटें जीतकर नेपाल की चौथी सबसे बड़ी पार्टी बनने का रिकॉर्ड बनाया। यह परिणाम नेपाल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव माना गया। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को सबसे ज्यादा समर्थन शहरी युवाओं पढ़े-लिखे मध्यम वर्ग विदेश से लौटे नेपाली नागरिकों से मिला।पार्टी ने सोशल मीडिया, पारदर्शी राजनीति और साफ छवि वाले उम्मीदवारों के सहारे अपनी पहचान बनाई। पार्टी के संस्थापक रबी लामिछाने पहले नेपाल के सबसे लोकप्रिय टीवी पत्रकारों में से एक थे। उनके शो में अक्सर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक गड़बड़ियों को उजागर किया जाता था। राजनीति में आने के बाद उन्होंने खुद को एंटी-करप्शन और सिस्टम सुधार की राजनीति के चेहरे के रूप में पेश किया। हालांकि आपको बता दे बालेन शाह RSP के सदस्य नहीं हैं, लेकिन उनकी 2022 में Kathmandu के मेयर चुनाव में स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में मिली जीत और RSP के उभार को नेपाल में नई राजनीति की लहर माना जाता है।

दोनों ने मिलकर यह संकेत दिया कि नेपाल में पारंपरिक दलों के अलावा भी जनता नए विकल्प तलाश रही है। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के उभार ने नेपाल की राजनीति में कई बदलाव लाए हैं नई पार्टियों को मौका मिलने लगा युवाओं की राजनीति में रुचि बढ़ी…पारंपरिक दलों पर सुधार का दबाव बढ़ाआज RSP नेपाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण शक्ति बनती जा रही है। और आज इसी पार्टी के दावेदार बालेन शाह को नेपाल की जनता प्रधानमंत्री के रूप में चुन रही है…आकड़ो के मुताबीक बालेन शाह नेपाल के प्रधानमंत्री बनेगें आधिकारी जानकारी आने में और नेपाल चुनाव के परिणाम आने में बस कुछ ही घंटे बचे है जिसके बाद नेपाल को उसका प्रधानमंत्री मिल जाएगा राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी नेपाल की सबसे तेजी से उभरने वाली राजनीतिक पार्टियों में से एक है। 2022 में स्थापना के कुछ ही महीनों के भीतर संसद में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराकर इस पार्टी ने यह साबित किया कि अगर जनता बदलाव चाहती है तो नई राजनीतिक ताकतें बहुत तेजी से उभर सकती हैं।

बालेन की जीत के कारण क्या? तो बता दे जनता की उम्मीदें नेपाल के नागरिक इन चुनावों से व्यापक बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं. लोग एक ऐसे ‘नए नेपाल’ की कल्पना कर रहे हैं जहां पारदर्शिता, ईमानदारी और स्थिरता हो. मतदाता चाहते हैं कि 1990 के बाद से सत्ता में रहे नेताओं की संपत्तियों की जांच हो और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं.रोजगार की चाह युवाओं की सबसे बड़ी मांग देश में रोजगार के अवसर बढ़ाने की है, ताकि काम की तलाश में विदेश जाने वाले युवाओं की संख्या कम हो सके. इसके लिए घरेलू उत्पादन, जलविद्युत परियोजनाओं और बाजार आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की बात की जा रही है. इसके अलावा सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा, मुफ्त माध्यमिक शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा प्रणाली जैसी मांगें भी प्रमुख हैं. बालेन ने इन सबको भुनाया और अपने चुनाव प्रचार में इसका भरपूर उपयोग किया.सोशल मीडिया नेपाल में काफी लोकप्रिय है. आप अंदाजा लगा सकते हैं कि सितंबर 2025 में इस पर लगाए गए बैन ने नेपाल में सरकार पलट दी।

इसी सोशल मीडिया पर पर बालेन की मजबूत उपस्थिति ने उन्हें लोकप्रिय बनाया. 2025 के आंदोलन के दौरान उनका सक्रिय रुख भी उनकी लोकप्रियता बढ़ाने में महत्वपूर्ण रहा. बालेन शाह ने क्रिसमस 2025 के दिन रवि लामिछाने और उज्यालो नेपाल पार्टी के नेता कुलमान घिसिंग से मुलाकात की. इन दो पार्टियों के साथ उनकी देश विकास पार्टी ने मिलकर चुनाव लड़ा. यह बालेन के लिए खरा सोना साबित हुआ. बालेन की ही तरह लामिछाने भी नेपाल में काफी लोकप्रिय हैं, वह पूर्व मीडिया कर्मी हैं. वहीं घिसिंग (सुशीला कार्की की अंतरिम सरकार में) मंत्री भी रह चुके हैं. एक रिपोर्ट के मुताबीक रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव प्रचार के दौरान भी उन्होंने मीडिया से दूरी बनाए रखी. मतदान के दिन भी उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करने से मना कर दिया और अपने पहचान वाले काले चश्मे के साथ पत्रकारों की भीड़ के बीच से निकल गए. नेपाल के कई मीडिया संगठनों को चिंता है कि अगर वे सत्ता में आते हैं तो उनका यही रवैया आगे भी जारी रह सकता है. वहीं कई युवा मतदाताओं का मानना है कि उनकी युवा ऊर्जा ही नेपाल को नई दिशा दे सकती है और वे देश के भविष्य के लिए एक नए दौर की शुरुआत कर सकते हैं.2026 का आम चुनाव नेपाल में पुराने राजनीतिक नेतृत्व और नई पीढ़ी के नेताओं के बीच मुकाबले के रूप में देखा गया. पिछले तीन दशकों से नेपाल की राजनीति मुख्य रूप से कुछ बड़े दलों के बीच घूमती रही है और देश में अस्थिर गठबंधन सरकारों का दौर रहा है।

1990 के बाद से नेपाल में 32 बार सरकार बदल चुकी है अब भारत को लेकर बालेन की नीति कैसी रहेगी ये भी जानना बेहद जरूरी है भारत को लेकर बालेन शाह का रुख संतुलित लेकिन स्वतंत्र नीति पर आधारित बताया जाता है. उनकी पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) का कहना है कि नेपाल भारत और चीन दोनों के साथ मजबूत संबंध बनाए रखना चाहता है, लेकिन किसी भी देश के सीधे प्रभाव में नहीं रहना चाहता. विशेषज्ञों का मानना है कि शाह का उभार नेपाल की राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव का संकेत है, जिसमें पारंपरिक ‘भारत समर्थक’ या ‘चीन समर्थक’ राजनीति की जगह अधिक व्यावहारिक और सम्मानजनक द्विपक्षीय संबंधों की सोच विकसित हो रही है.अब आपको हम ये बताएंगे की नेपाल का ये चुनाव किन किन मुद्दो पर अहम है दरअसल पिछले साल के प्रदर्शनों के बाद यह चुनाव पुराने और नए नेतृत्व के बीच मुक़ाबले के रूप में देखा जा रहा है।

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी 2022 में हुए आम चुनाव में चौथे स्थान पर रही थी. करीब 8 लाख पहली बार वोट देने वाले देश के युवाओं ने इस चुनाव में अहम भूमिका निभाई है. राजनीतिक दलों ने उन्हें रोज़गार, भ्रष्टाचार पर कार्रवाई और बेहतर शासन के वादों के साथ लुभाने करने की कोशिश की. पिछले तीन दशकों से नेपाल में अस्थिर गठबंधन सरकारों का दौर रहा है, जिन पर मुख्य रूप से तीन बड़े दलों का दबदबा रहा है. इस बार किसी बड़े राष्ट्रीय गठबंधन का गठन नहीं हुआ है. इसके कारण यह साफ़ हो सकेगा कि मतदाताओं के बीच अलग-अलग दलों और उम्मीदवारों की वास्तविक स्थिति क्या है. इस चुनाव में कई नई पार्टियां और नए चेहरे भी सामने आए हैं. लगभग एक-तिहाई उम्मीदवार निर्दलीय हैं. इन सब संकेतों से लगता है कि नेपाल के कई लोग नई सोच और नए नेतृत्व की तलाश में हैं. अगर बालेन शाह जीतते हैं तो यह नेपाल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव माना जाएगा, क्योंकि लंबे समय से वही पुराने चेहरे अस्थिर गठबंधन सरकारों का नेतृत्व करते रहे हैं.नेपाल में कैसे होता है आम चुनाव?-तो बता दे बिते गुरुवार को मतदाताओं ने केवल अगले नेता के चुनाव के लिए ही वोट नहीं दिया, बल्कि संसद के 275 सदस्यों के चुनाव के लिए भी मतदान किया. नेपाल का आम चुनाव मिश्रित प्रणाली पर आधारित है. हर मतदाता को दो वोट देने का अधिकार मिला. 165 सांसद फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट प्रणाली से चुने जाते हैं, यानी जिस उम्मीदवार को सबसे ज़्यादा वोट मिलते हैं वह सीट जीतता है.बाकी 110 सांसदों का चुनाव राष्ट्रीय स्तर पर किसी पार्टी को मिले कुल वोट प्रतिशत के आधार पर होता है. इस चुनाव में करीब 1.9 करोड़ लोग वोट देने के पात्र थे. मतदान खत्म होने के बाद अधिकारियों ने अनुमान जताया कि मतदान प्रतिशत करीब 60 प्रतिशत रहा।

बालेन शाह का उभार नेपाल की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है. बालेन खुद भी यही बात कह चुके हैं. हालांकि, उनका अब तक का कड़ा रुख आने वाले समय में कैसा रहेगा यह आने वाले समय में ही पता चलेगा. यदि वे प्रधानमंत्री बनते हैं, तो वे देश के सबसे युवा नेताओं में से एक होंगे. उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना, राजनीतिक स्थिरता बनाए रखना और आर्थिक सुधारों को लागू करना होगी. उन्हें अपने देश के विकास को आगे ले जाने के लिए अपने पड़ोसियों से संबंध को बेहतर बनाने पर भी ध्यान देना होगा।

INPUT-ANANYA MISHRA

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