नई दिल्ली: POCSO मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली अग्रिम जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील

नई दिल्ली : प्रयागराज के झूसी थाने में दर्ज यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम के मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी को इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा दी गई अग्रिम जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की गई है।

यह अपील मामले के शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने दायर की है। उन्होंने उच्च न्यायालय के 25 मार्च 2026 के आदेश को चुनौती दी है।

याचिका में मुख्य दलीलें
शिकायतकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ लगाए गए आरोपों की गंभीरता पर पर्याप्त विचार नहीं किया। याचिका में यह भी आशंका जताई गई है कि स्वामी और उनके शिष्य गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे निष्पक्ष जांच प्रभावित होने का खतरा है।

मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला प्रयागराज के झूसी पुलिस स्टेशन में दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है, जिसमें स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर कई बटुकों (युवा शिष्यों) के कथित यौन शोषण का आरोप लगाया गया है। यह प्राथमिकी अदालत के निर्देश पर दर्ज की गई थी।

27 फरवरी को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने स्वामी की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी और मामले की सुनवाई के बाद 25 मार्च को दोनों को अग्रिम जमानत दे दी थी। उच्च न्यायालय ने जांच को बाहरी प्रभाव से मुक्त रखने और आवेदकों को जांच में पूर्ण सहयोग करने का निर्देश दिया था।

शिकायतकर्ता की मांग
आशुतोष ब्रह्मचारी ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द किया जाए और मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने गवाहों की सुरक्षा और निष्पक्ष जांच के लिए भी दिशा-निर्देश देने की मांग की है।

सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका पर अभी सुनवाई की तारीख घोषित नहीं हुई है।

यह मामला धार्मिक गुरुओं पर लगे गंभीर आरोपों और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर व्यापक चर्चा का विषय बन गया है।