कायमगंज, फर्रुखाबाद। जिले के कंपिल थाना क्षेत्र के गांव हमीरपुर काजी में फूड प्वाइजनिंग की गंभीर घटना सामने आई। बासी मसूर की दाल और चावल खाने के बाद एक ही परिवार के आठ लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। पीड़ितों में अधिकांश बच्चे शामिल हैं। सभी को आनन-फानन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कायमगंज पहुंचाया गया, जहां दो बच्चियों की हालत गंभीर होने पर उन्हें डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल फर्रुखाबाद रेफर कर दिया गया।
घटना के बाद गांव में हड़कंप मच गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और ग्रामीणों को दवाइयों के साथ ओआरएस के पैकेट वितरित किए।
रात का बचा खाना बना बीमारी की वजह
गांव निवासी प्रवेश कुमार की पत्नी शकुंतला देवी ने बताया कि सुबह घर में मसूर की दाल बनाई गई थी। परिवार के सभी सदस्यों ने दोपहर में भोजन किया। बची हुई दाल को रात में दोबारा गर्म करके खाया गया। अगले दिन सुबह परिवार के लोगों ने दलिया खाया, जिसके कुछ समय बाद ही एक-एक कर सभी की तबीयत बिगड़ने लगी।
परिजनों के अनुसार सभी लोगों को अचानक पेट में तेज दर्द, उल्टियां, दस्त और ऐंठन की शिकायत होने लगी। शुरुआत में लोगों को सामान्य बीमारी का अंदेशा था, लेकिन जब बच्चों की हालत तेजी से बिगड़ने लगी तो उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया।
चार बेटियां समेत कई बच्चे हुए बीमार
फूड प्वाइजनिंग की चपेट में आने वालों में शकुंतला देवी (40), उनकी बेटियां गंगोत्री (20), डोली (16), अंजलि (10) और कनिष्का (9) शामिल हैं। इसके अलावा प्रवेश कुमार के भाई मनोज कुमार की बेटियां अन्नू (14) और दिव्या (10) भी बीमार हो गईं। परिवार की बुजुर्ग सदस्य चंदावती की तबीयत भी खराब हुई, जिनका उपचार गांव में ही कराया गया।
अस्पताल में भर्ती मरीजों में अन्नू और अंजलि की हालत अधिक गंभीर पाई गई। चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद दोनों बच्चियों को बेहतर इलाज के लिए लोहिया अस्पताल रेफर कर दिया।
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अस्पताल में मची अफरा-तफरी, डॉक्टरों ने संभाला मोर्चा
एक साथ कई मरीजों के पहुंचने से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कायमगंज में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। चिकित्सकों ने तुरंत सभी मरीजों का उपचार शुरू किया। डॉक्टरों ने उन्हें दवाइयां, ग्लूकोज और आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई।
सीएचसी अधीक्षक डॉ. विपिन सिंह ने बताया कि फूड प्वाइजनिंग के सात मरीज अस्पताल लाए गए थे। इनमें दो बच्चियों की स्थिति चिंताजनक होने के कारण उन्हें उच्च केंद्र रेफर किया गया। अन्य मरीजों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में चलाया जागरूकता अभियान
मामले की जानकारी मिलते ही शुक्रवार देर रात डॉ. विपिन सिंह के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीम गांव पहुंची। टीम ने प्रभावित परिवार से मुलाकात कर बीमार लोगों की स्थिति की जानकारी ली। घर पर मौजूद बुजुर्ग महिला चंदावती का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराई गईं।
इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव के दो दर्जन से अधिक घरों का सर्वे किया और लोगों को खाद्य सुरक्षा तथा स्वच्छता के प्रति जागरूक किया। ग्रामीणों को सलाह दी गई कि गर्मी के मौसम में बासी भोजन का सेवन न करें और भोजन को सुरक्षित तरीके से संग्रहित करें। टीम ने एहतियात के तौर पर ओआरएस पैकेट और आवश्यक दवाइयों का वितरण भी किया।
गर्मी में बढ़ जाता है फूड प्वाइजनिंग का खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी के मौसम में लंबे समय तक रखा गया भोजन जल्दी खराब हो जाता है। ऐसे भोजन में बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं, जिससे फूड प्वाइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों ने लोगों से ताजा भोजन करने, भोजन को ढककर रखने तथा खराब या बासी भोजन से बचने की अपील की है।
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। गांव में किसी अन्य व्यक्ति के बीमार होने की सूचना नहीं है, लेकिन एहतियात के तौर पर निगरानी जारी रखी गई है।














































