UP: लखनऊ छावनी परिषद में कार्यरत सफाई कर्मी उमेश कुमार का तबादला राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। मामला उस समय चर्चा में आया जब 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती के अवसर पर उमेश कुमार की बेटी अंजलि मैसी ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को भंडारे का प्रसाद परोसा था और पूड़ी खिलाई थी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उमेश को सुरक्षा निगरानी संबंधी कार्य से हटाकर दोबारा सफाई व्यवस्था में तैनात कर दिया गया।
अखिलेश यादव ने भाजपा पर साधा निशाना
पीडीए समाज की एक महिला के पिता को, पुरुषवादी भाजपा सरकार सिर्फ़ इसलिए प्रताड़ित कर रही है क्योंकि हमने ‘बाबासाहेब जी की जयंती’ पर अपनी उस छोटी बहन के यहाँ पूड़ी खा ली थी।
इतनी निकृष्ट राजनीति तो उन अंग्रेजों ने भी नहीं की थी, जिनके लिए भाजपा के वज़ीफ़ाजीवी वैचारिक पूर्वज… pic.twitter.com/NwV7lRaS3l
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) May 7, 2026
इस कार्रवाई को लेकर अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पीडीए समाज के लोगों को राजनीतिक कारणों से प्रताड़ित किया जा रहा है। अखिलेश ने कहा कि केवल उनके साथ भोजन करने या प्रसाद खिलाने की वजह से किसी कर्मचारी को निशाना बनाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने इसे भाजपा की ‘दमनकारी राजनीति’ बताते हुए कहा कि इससे पहले भी उनके संपर्क में आने वाले लोगों को परेशान किए जाने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
कर्मचारी का आरोप, प्रशासन का बचाव
उमेश कुमार का कहना है कि उनकी बेटी द्वारा अखिलेश यादव को प्रसाद खिलाने के बाद से ही उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है। उनके अनुसार, अक्टूबर 2023 से उन्हें प्रतिष्ठानों की सुरक्षा निगरानी की जिम्मेदारी दी गई थी, जिसे अब अचानक वापस ले लिया गया। वहीं, छावनी परिषद प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उमेश मूल रूप से सफाई कर्मी हैं और उनका स्थानांतरण सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
सेवा नियमों पर उठे सवाल
छावनी परिषद के मुख्य अधिशासी अधिकारी अभिषेक राठौड़ ने बताया कि उमेश कुमार के खिलाफ पहले से कई शिकायतें और चेतावनियां लंबित थीं। प्रशासन का कहना है कि उमेश ने अंबेडकर जयंती कार्यक्रम के लिए रक्षा संपदा विभाग और सैन्य अधिकारियों को सीधे पत्र भेजे, जो सेवा आचरण नियमों के विरुद्ध माना गया। दूसरी ओर, उमेश का दावा है कि उन्होंने कार्यक्रम की अनुमति और सूचना देने की प्रक्रिया के तहत ही पत्राचार किया था। इस पूरे घटनाक्रम ने अब राजनीतिक प्रतिशोध बनाम प्रशासनिक अनुशासन की बहस को और तेज कर दिया है।

















































