पश्चिम बंगाल : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मोताब शेख की जीत खास चर्चा में है। फरक्का सीट से चुनाव लड़ रहे शेख ने BJP के सुधीर चौधरी को 8 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से हराकर जीत दर्ज की। लेकिन उनकी यह जीत सामान्य नहीं है, बल्कि कई चुनौतियों के बाद हासिल हुई है।
चुनाव से पहले नाम हटने की मुश्किल
चुनाव घोषणा से कुछ हफ्ते पहले तकनीकी कारणों से मोताब शेख का नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया था। इससे उनका चुनाव लड़ना मुश्किल हो गया था। नाम बहाल न होने पर उन्होंने कानूनी लड़ाई लड़ने का फैसला किया।
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
मोताब शेख ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली बेंच ने मामले को गंभीरता से लिया और नए बने अपीलेट ट्रिब्यूनल को तुरंत सुनवाई का निर्देश दिया।
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ट्रिब्यूनल ने दी राहत, पासपोर्ट समेत दस्तावेज सही पाए
अपीलेट ट्रिब्यूनल ने मोताब शेख के पासपोर्ट समेत सभी दस्तावेजों की जांच की और उन्हें वैध मतदाता घोषित कर दिया। करीब 27 लाख आवेदनों में उनका मामला सबसे पहले मंजूर हुआ, जो खुद में एक रिकॉर्ड है।
नाम बहाल होते ही शुरू किया चुनाव प्रचार
नाम बहाल होने के तुरंत बाद मोताब शेख ने फरक्का सीट से चुनावी मैदान में उतरकर प्रचार शुरू किया। उन्होंने स्थानीय मुद्दों पर जोर देते हुए जनता से समर्थन मांगा।
8 हजार वोटों से दी BJP को मात
कड़ी मेहनत और कानूनी लड़ाई के बाद मोताब शेख ने BJP के मजबूत उम्मीदवार सुधीर चौधरी को 8,000 से अधिक वोटों से हराकर कांग्रेस के लिए फरक्का सीट जीत ली। उनकी यह जीत न सिर्फ कांग्रेस के लिए बल्कि लोकतंत्र में कानूनी अधिकारों की जीत के रूप में भी देखी जा रही है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा
मोताब शेख की इस संघर्षपूर्ण जीत की पूरे पश्चिम बंगाल में चर्चा हो रही है। इसे “इच्छाशक्ति और कानूनी लड़ाई” की जीत बताया जा रहा है। उनकी सफलता उन कई उम्मीदवारों के लिए उदाहरण बन गई है जो वोटर लिस्ट से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे थे।











































