‘ममता बनर्जी को चुनाव में हराया न होता तो ऐसा…’, चंद्रनाथ हत्याकांड में शुभेंदु अधिकारी ने लगाए गंभीर आरोप

पश्चिम बंगाल में बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की हत्या के बाद राज्य की राजनीति में तनाव बढ़ गया है। गुरुवार को बारासात स्टेट जनरल अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद शुभेंदु अधिकारी ने इस मामले को राजनीतिक प्रतिशोध से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए।

राजनीतिक दुश्मनी की वजह से हुई हत्या: शुभेंदु अधिकारी

मीडिया से बातचीत में शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि यदि चंद्रनाथ रथ उनके पीए नहीं होते, तो शायद उन्हें निशाना नहीं बनाया जाता। उन्होंने दावा किया कि ममता बनर्जी को भवानीपुर और नंदीग्राम जैसे चुनावी मुकाबलों में चुनौती देने और हराने की वजह से उनके करीबियों को टारगेट किया जा रहा है। अधिकारी ने कहा कि यह हत्या पूरी तरह सुनियोजित लगती है और चंद्रनाथ रथ की किसी से व्यक्तिगत या राजनीतिक दुश्मनी नहीं थी।

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पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चार गोलियां लगने की पुष्टि

शुभेंदु अधिकारी के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया है कि चंद्रनाथ रथ को चार गोलियां मारी गई थीं। उन्होंने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने का भरोसा दिलाते हुए कहा कि दोषियों की जल्द गिरफ्तारी और कड़ी सजा जरूरी है।

मध्यमग्राम में घर के पास हुआ हमला

जानकारी के मुताबिक, बुधवार रात मध्यमग्राम इलाके में चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस के अनुसार, कार और बाइक पर सवार हमलावरों ने उनकी गाड़ी का पीछा किया और घर से करीब 100 मीटर पहले वाहन रुकवाकर ताबड़तोड़ फायरिंग की।इस हमले में रथ के ड्राइवर बुद्धदेब बेरा भी गंभीर रूप से घायल हो गए। अस्पताल सूत्रों के अनुसार उनकी कई सर्जरी की गई हैं और हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है।

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जांच में जुटी पुलिस, कुछ संदिग्ध हिरासत में

शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि राज्य के डीजीपी ने उन्हें जानकारी दी है कि घटना में इस्तेमाल की गई एक मोटरसाइकिल घटनास्थल से लगभग चार किलोमीटर दूर बरामद हुई है। पुलिस ने कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया है और जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच सीआईडी, फॉरेंसिक टीम और एसआईटी संयुक्त रूप से कर रही हैं। हालांकि, उन्होंने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पहले भी पुलिस ऐसे मामलों को सुलझाने में सक्षम रही है, लेकिन कई बार उन्हें स्वतंत्र रूप से काम करने की अनुमति नहीं मिलती।

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