शंकराचार्य मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज ने खुद को सुनवाई से अलग किया, अवमानना याचिका पर सुनवाई में हुआ बदलाव

प्रयागराज: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुन्दानंद के खिलाफ चल रहे पॉक्सो मामले से जुड़ी अवमानना याचिका की सुनवाई कर रहे इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने खुद को इस मामले से अलग कर लिया है। इस फैसले से केस की सुनवाई की प्रक्रिया में नया मोड़ आ गया है।

अवमानना याचिका का मामला

आशुतोष महाराज, जिन्होंने शंकराचार्य और उनके शिष्य के खिलाफ पॉक्सो का केस दर्ज कराया था, ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि शंकराचार्य और उनके शिष्य को हाईकोर्ट से मिली जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया जा रहा है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि जमानत की शर्तों के बावजूद आरोपी निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं, जिसके चलते उन्होंने अदालत से उचित कार्रवाई की मांग की है।

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न्यायमूर्ति का रिक्यूजल

न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल, जो इस अवमानना याचिका की सुनवाई कर रहे थे, ने बुधवार को स्वयं को मामले से अलग करने का फैसला लिया। कोर्ट ने इसकी जानकारी संबंधित पक्षकारों को दे दी है। अब इस याचिका को हाईकोर्ट के नए जज को आवंटित किया जाएगा।

पृष्ठभूमि

यह पूरा मामला शंकराचार्य श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुन्दानंद के खिलाफ प्रयागराज में दर्ज पॉक्सो मामले से जुड़ा हुआ है। आशुतोष महाराज द्वारा दायर की गई प्राथमिकी के आधार पर दोनों के खिलाफ गंभीर आरोप लगे थे। हाईकोर्ट ने पहले दोनों को जमानत दी थी, जिसकी शर्तों के कथित उल्लंघन को लेकर अब अवमानना की याचिका दायर की गई थी।

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आगे क्या?

न्यायमूर्ति के रिक्यूजल के बाद अब इस संवेदनशील मामले की सुनवाई कौन सा जज करेगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में आने वाला फैसला धार्मिक और कानूनी दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण होगा।

दोनों पक्षों के वकील अब नए जज के समक्ष अपनी दलीलें पेश करेंगे। फिलहाल शंकराचार्य और उनके शिष्य पर लगे आरोपों और जमानत शर्तों के उल्लंघन के मामले में आगे की सुनवाई का इंतजार है।

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