‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का X अकाउंट भारत में बैन कर दिया गया है। बैन किए जाने के बाद राजनीतिक और डिजिटल बहस तेज हो गई है। यह पेज एक कथित टिप्पणी को लेकर उपजे विवाद के बाद चर्चा में आया था और तेजी से बड़ी संख्या में फॉलोअर्स जुटाने में सफल रहा।
वायरल बयान के बाद शुरू हुआ विवाद
पूरा मामला उस समय शुरू हुआ जब मुख्य न्यायधीश जस्टिस सूर्यकांत ने एक सुनवाई के दौरान युवाओं और रोजगार को लेकर टिप्पणी की थी। सुनवाई के दौरान उन्होंने कथित रूप से कहा था कि कुछ युवा ‘कॉकरोच की तरह’ होते हैं, लॉ, मीडिया और आरटीआई एक्टिविज्म कर सिस्टम में घुस जाते हैं। इस टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली और कई यूजर्स ने इसे युवाओं के प्रति आपत्तिजनक बताया।
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की शुरुआत
इसी नाराजगी के माहौल में सोशल मीडिया पहल के तौर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की शुरुआत हुई। देखते ही देखते यह पेज वायरल हो गया और लाखों लोग इससे जुड़ गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस पेज ने फॉलोअर्स के मामले में कई बड़े राजनीतिक दलों को भी पीछे छोड़ दिया था। इंस्टाग्राम पर भी इसके बड़े पैमाने पर 13.2 फॉलोअर्स हो गए।
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X अकाउंट भारत में ब्लॉक, इंस्टाग्राम पेज अभी सक्रिय
गुरुवार को अचानक इस पेज का X अकाउंट भारत में दिखाई देना बंद हो गया। इसके बाद दावा किया गया कि अकाउंट को भारत में बैन किया गया है। हालांकि इंस्टाग्राम पेज अभी भी सक्रिय बताया जा रहा है।
फाउंडर अभिजीत दिपके का आरोप
पेज के फाउंडर अभिजीत दिपके ने इस कार्रवाई पर नाराजगी जताई है। उन्होंने एक वीडियो जारी कर कहा कि पहले अकाउंट को हैक करने की कोशिश हुई और जब वह सफल नहीं हुई तो उसे बैन कर दिया गया। उन्होंने कहा कि यह कदम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ है और उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस मुद्दे पर सवाल उठाएं।
सरकार और लोकतंत्र पर उठाए सवाल
दिपके ने आरोप लगाया कि पेज को बिना किसी स्पष्ट कारण के हटाया गया है, जबकि वे केवल जवाबदेही की मांग कर रहे थे। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों पर सवाल उठाने वाला कदम बताया और युवाओं से समर्थन की अपील की।
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विवाद के केंद्र में टिप्पणी और सफाई
जिस बयान को लेकर पूरा विवाद शुरू हुआ था, उसमें कथित रूप से युवाओं की तुलना “कॉकरोच” से की गई थी। बाद में यह मामला तूल पकड़ने पर सफाई भी दी गई कि टिप्पणी का संदर्भ फर्जी डिग्रीधारकों और गलत गतिविधियों से जुड़ा था, न कि सभी युवाओं से।
सोशल मीडिया पर बहस जारी
इस पूरे घटनाक्रम ने सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की सीमा, व्यंग्य और प्लेटफॉर्म मॉडरेशन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। समर्थक इसे सेंसरशिप बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे आवश्यक कार्रवाई के रूप में देख रहे हैं।













































