अमेठी : अमेठी के लखनऊ-प्रतापगढ़ रेल ट्रैक पर जरबंधन का पुरवा गांव के पास रेलवे ट्रैक पार करते समय कटरा कसारा गांव के रहने वाले व्यापारी राम आसरे जायसवाल 65 वर्ष की आज सुबह बनारस-लखनऊ इंटरसिटी एक्सप्रेस की चपेट में आने से मौत हो गई. बुजुर्ग की मौत के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।फिलहाल पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज मामले की जांच शुरू कर दी है.
परिजनों के मुताबिक राम आसरे जायसवाल रोज की तरह बृहस्पतिवार सुबह घर से साइकिल से फेरी करने के लिए घर से निकले थे. लखनऊ-प्रतापगढ़ रेल ट्रैक पर जरबंधन का पुरवा के पास रेलवे ट्रैक पार करते समय वह गुजर रही बनारस-लखनऊ इंटरसिटी एक्सप्रेस की चपेट में आ गए. हादसे में उनकी मौके पर मौत हो गई. स्थानीय लोगों ने मौत के बाद फोन कर जानकारी उन्हें दी. स्थानीय लोगों के अनुसार, उसी समय दूसरे ट्रैक पर मालगाड़ी गुजर रही थी. इसके चलते उन्हें दूसरी ओर से आ रही इंटरसिटी ट्रेन का अंदाजा नहीं लग सका और हादसा हो गया. मिश्रौली स्टेशन मास्टर जितेंद्र ने बताया कि इंटरसिटी एक्सप्रेस की चपेट में आने से राम आसरे के मौत हुई है। एसओ संजय सिंह ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है, कार्रवाई की जा रही है.
वर्षों से उठ रही अंडरपास की मांग
तारापुर, चक्रधरपुर, गडेरियन का पुरवा, मिश्रौली समेत कई गांवों के ग्रामीण इस स्थान पर अंडरपास बनवाने की मांग लंबे समय से कर रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग से प्रतिदिन छात्र-छात्राएं और बड़ी संख्या में लोग साइकिल से रेलवे ट्रैक पार करते हैं. पहले भी प्रदर्शन कर अंडरपास निर्माण की मांग उठाई जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. बृहस्पतिवार को हादसे के बाद भी छात्राएं साइकिल ले कर ट्रैक पार करतीं नजर आई. स्थानीय निवासी पवन वर्मा, पिंटू वर्मा, जमुना वर्मा, रिंकू वर्मा, लालजी वर्मा, लालता वर्मा और सरवन वर्मा ने बताया कि पिछले चार वर्षों में इस स्थान पर करीब कई हादसे हो चुके हैं.
पिता को खोकर बिलखती रहीं तीनों बेटियां
राम आसरे जायसवाल फेरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे. उन्होंने अपनी पांच बेटियों में दो की शादी कर दी थी। उनकी मौत के बाद पुरमा (15), बबली (13) और डाली (11) के सिर से पिता का साया उठ गया. हादसे की सूचना मिलते ही तीनों बेटियां पिता को याद कर फफक-फफक कर रोने लगीं. उन्हें बिलखता देख घर में मौजूद अन्य परिजनों का भी रो-रोकर बुरा हाल हो गया. रिश्तेदार और ग्रामीण बेटियों को ढांढस बंधाते रहे. पूरे गांव में दिनभर गमगीन माहौल बना रहा.
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