UP: अमेठी जिले में पर्यावरण संरक्षण, पोषण सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुक्रवार से ‘वीबीजी रामजी योजना’ की शुरुआत की जा रही है। इस पहल के तहत जिले के सभी 13 विकासखंडों की 65 ग्राम पंचायतों में ग्राम वन विकसित किए जाएंगे। योजना के जरिए गांवों को हरित बनाने के साथ-साथ ग्रामीणों को भविष्य में अतिरिक्त आय और पौष्टिक फल उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
65 ग्राम पंचायतों में लगाए जाएंगे 16,250 पौधे
योजना के प्रथम चरण में प्रत्येक चयनित ग्राम पंचायत में सहजन, आंवला और बेर के 250-250 पौधे रोपे जाएंगे। इस प्रकार पहले दिन कुल 16,250 पौधों का रोपण किया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि पौधों के रोपण के साथ उनकी सुरक्षा, सिंचाई और नियमित देखभाल की भी व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, ताकि ग्राम वन लंबे समय तक सुरक्षित और विकसित रह सकें।
हरियाली के साथ पोषण और रोजगार पर जोर
इस योजना का उद्देश्य केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं है। सहजन, आंवला और बेर जैसे फलदार पौधे भविष्य में ग्रामीणों को पोषण उपलब्ध कराएंगे, वहीं इनके फलों से अतिरिक्त आय के अवसर भी पैदा होंगे। प्रशासन का मानना है कि ग्राम वन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
जनभागीदारी से सफल बनाने की तैयारी
योजना को जनआंदोलन का स्वरूप देने के लिए जिले के सभी 13 विकासखंडों की दो-दो ग्राम पंचायतों में कुल 26 जन सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधि, ग्राम प्रधान, स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं, मनरेगा श्रमिक और ग्रामीण शामिल होंगे। सम्मेलन के माध्यम से योजना के उद्देश्य, लाभ और ग्राम वन की अवधारणा की जानकारी दी जाएगी, जिसके बाद संबंधित गांवों में पौधारोपण अभियान शुरू होगा।
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सीडीओ ने बताया सहजन पर रहेगा विशेष फोकस
मुख्य विकास अधिकारी पूजा साहू ने बताया कि प्रत्येक विकासखंड में पांच ग्राम पंचायतों का चयन किया गया है, जहां ग्राम वन विकसित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि योजना में सहजन के पौधों पर विशेष जोर दिया जा रहा है क्योंकि यह पोषक तत्वों से भरपूर होता है। भविष्य में इसे मिड-डे मील जैसी पोषण योजनाओं से भी जोड़े जाने की संभावना है। इसके अलावा आंवला और बेर के फलदार पौधे ग्रामीणों के लिए पोषण और आर्थिक लाभ दोनों का माध्यम बनेंगे।

















































