राम मंदिर चढ़ावा चोरी घोटाला: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार आरोपी अविनाश शुक्ला को अयोध्या पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेकर उसके पैतृक गांव प्रतापगढ़ के लिए रवाना हो गई है। एसओजी प्रभारी और मामले के विवेचक पुलिस टीम के साथ मौजूद हैं। अदालत से पुलिस को 13 घंटे की रिमांड मिली है, जिसके दौरान आरोपी से गहन पूछताछ के साथ विभिन्न स्थानों पर साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई की जाएगी।
चार पहिया वाहन और अन्य अहम सुरागों की तलाश
पुलिस जांच का मुख्य फोकस अविनाश के उस चार पहिया वाहन की तलाश पर है, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर चोरी की रकम और अन्य सामान को इधर-उधर ले जाने में किया गया हो सकता है। जांच अधिकारियों का मानना है कि वाहन की बरामदगी से मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुराग हाथ लग सकते हैं। इसके अलावा नकदी और अन्य भौतिक साक्ष्य भी मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
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चोरी की रकम और जेवर बरामद करने की कोशिश
जांच में सामने आया है कि अविनाश शुक्ला ने चोरी की बड़ी रकम और मंदिर में चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषण अलग-अलग स्थानों पर छिपा रखे हैं। पुलिस के अनुसार आरोपी से पूछताछ और अब तक मिले साक्ष्यों के आधार पर यह जानकारी मिली है कि कुछ नकदी और जेवर अयोध्या तथा प्रतापगढ़ स्थित ठिकानों पर हो सकते हैं। इसी आधार पर पुलिस ने सबसे पहले अविनाश की कस्टडी रिमांड मांगी थी, जिसे अदालत ने मंजूर कर दिया।
पहले भी हुई थी लाखों रुपये की बरामदगी
इस मामले में पुलिस ने अविनाश शुक्ला समेत टिन्नू यादव, सुभाष, अनुकल्प, लवकुश, मनीष, करुणेश और रमाशंकर को गिरफ्तार किया था। आरोपियों की गिरफ्तारी के दौरान सबसे अधिक 20.39 लाख रुपये नकद और कुछ विदेशी डॉलर अविनाश के कब्जे से बरामद हुए थे। अब पुलिस को शक है कि इसके अलावा भी बड़ी रकम और कीमती सामान छिपाकर रखा गया है, जिसकी बरामदगी के लिए रिमांड के दौरान कार्रवाई की जा रही है।
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भाई की भूमिका भी जांच के दायरे में
जांच के दौरान अविनाश शुक्ला के भाई की गतिविधियां भी पुलिस के रडार पर आ गई हैं। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में वह नोटों की गड्डियों के साथ रील बनाता दिखाई दे रहा है। सूत्रों के मुताबिक, कुछ महीने पहले वह अयोध्या में अविनाश के साथ रहा था और बाद में प्रतापगढ़ लौट गया। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि चोरी की रकम को ठिकाने लगाने में उसकी कोई भूमिका थी या नहीं। यदि जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो उसे भी मामले में आरोपी बनाया जा सकता है।
















































