उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव (ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य) की तारीखें और आरक्षण की अंतिम सूची अभी तक आधिकारिक रूप से घोषित नहीं हुई है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में चुनावी माहौल गरमाने लगा है। वर्तमान ग्राम प्रधानों और संभावित उम्मीदवारों ने घर-घर जाकर जनसंपर्क, विकास कार्यों का प्रचार और समर्थन जुटाने की गतिविधियां तेज कर दी हैं। पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा है कि चुनाव समय पर होंगे और अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच पूरी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 28 फरवरी 2026 को होने की संभावना है।
तारीखों पर सस्पेंस, लेकिन मंत्री का बड़ा दावा
पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने हाल ही में स्पष्ट किया कि यूपी पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समय पर होंगे। उन्होंने बताया कि बैलेट पेपर जिलों में पहुंच चुके हैं, मतदाता सूची की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और 28 फरवरी 2026 को अंतिम वोटर लिस्ट प्रकाशित होगी। चुनाव अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच संपन्न हो जाएंगे। कुछ सोशल मीडिया और अनौपचारिक स्रोतों में अप्रैल-मई में चार चरणों (20, 25, 30 अप्रैल और 4 मई) में चुनाव की अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से अभी कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है।
आरक्षण की स्थिति में देरी, ओबीसी आयोग गठन अटका
आरक्षण सूची (ग्राम प्रधान, सदस्य पदों पर SC/ST/OBC/महिला आरक्षण) अभी तय नहीं हुई है। पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन नहीं हुआ है, जिसके बाद आरक्षण प्रक्रिया (जनगणना 2011 आधारित) पूरी होती है। इस प्रक्रिया में 3-5 महीने लग सकते हैं। यदि आयोग जल्द गठित होता है तो भी जून-जुलाई तक आरक्षण फाइनल होने की उम्मीद है। कई जिलों में उम्मीदवारों की बेचैनी बढ़ गई है, क्योंकि बिना आरक्षण सूची के वे अपनी रणनीति नहीं बना पा रहे। राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर अभी 2015 की पुरानी आरक्षण सूची उपलब्ध है।
गांवों में तेज हुई चुनावी हलचल
चुनाव की अनिश्चितता के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में सरगर्मी चरम पर है। वर्तमान ग्राम प्रधान विकास कार्यों (जैसे सड़क, नाली, स्वच्छता, आवास योजना) का प्रचार बढ़ा रहे हैं और नए दावेदार घर-घर जाकर वादे कर रहे हैं। कई जगहों पर सामाजिक संगठन, जातिगत समीकरण और पुरानी रंजिशें सक्रिय हो गई हैं। उम्मीदवार खर्च बढ़ा रहे हैं, पोस्टर लगवा रहे हैं और सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विकास और पारदर्शिता अब प्रमुख मुद्दे बनेंगे।
मतदाता सूची और अन्य तैयारियां
राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची संशोधन का काम तेज किया है। ड्राफ्ट लिस्ट पहले से जारी है और दावे-आपत्तियां सुलझाई जा रही हैं। अंतिम लिस्ट फरवरी अंत तक आएगी। पिछले चुनाव (2021) में करीब 1 साल देरी हुई थी, लेकिन इस बार सरकार दावा कर रही है कि समय पर चुनाव होंगे। कार्यकाल जून-जुलाई 2026 में पूरा होने के कारण चुनाव उसी समय तक कराना जरूरी है।
यह चुनाव यूपी की ग्रामीण राजनीति को आकार देगा और 2027 विधानसभा चुनावों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगा। उम्मीदवारों और ग्रामीणों में उत्साह है, लेकिन आधिकारिक घोषणा का इंतजार बरकरार है।
INPUT-ANANYA MISHRA







































