भारत को भ्रष्टाचार-मुक्त बनाने के लिए भाजपा नेता ने प्रधानमंत्री को दिए 10 सुझाव

भाजपा नेता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने देश को भ्रष्टाचार-मुक्त बनाने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी को 10 सुझाव दिए हैं. उपाध्याय ने ये सुझाव ‘भारत के मन की बात मोदी के साथ’ के माध्यम से प्रधानमंत्री को दिए हैं.


अश्विनी उपाध्याय ने ट्वीट करके इसकी जानकारी दी. उन्होंने लिखा “क्या आपका थाना तहसील और जिला भ्रष्टाचार से मुक्त है? मोदी जी ने पूरी दुनिया में भारत का परचम लहराया है और मोदी जी ही भारत को भ्रष्टाचार से मुक्त कर सकते हैं इसलिए अपने सुझाव जरूर दें”.



प्रधानमंत्री को अश्विनी उपाध्याय के सुझाव

  • एक लाख रुपये से महंगी चल-अचल संपत्ति को आधार से लिंक किया जाए

  • सौ रुपये से बड़े नोट और दस हजार रुपये से महंगे समान के कैश लेन-देन पर प्रतिबंध लगाया जाए

  • पुलिस सुधार और न्यायिक सुधार तथा 25 साल से अधिक पुराने सभी कानूनों की समीक्षा किया जाए

  • भ्रष्टाचारियों, अपराधियों और अलगाववादियों का नार्को, पॉलीग्राफ और ब्रेनमैपिंग टेस्ट अनिवार्य करने के लिए एक कानून बनाया जाए

  • घूसखोरों और दलालों की शत-प्रतिशत चल-अचल संपत्ति जब्त करने तथा उन्हें सश्रम आजीवन कारावास की सजा देने के लिए एक नया कानून बनाया जाए

  • टैक्सचोरों और भगोड़ों की शत-प्रतिशत चल-अचल संपत्ति जब्त करने तथा उन्हें सश्रम आजीवन कारावास की सजा देने के लिए एक नया कानून बनाया जाए

  • जमाखोरों और कालाबाजारियों की शत-प्रतिशत चल-अचल संपत्ति जब्त करने तथा उन्हें सश्रम आजीवन कारावास की सजा देने के लिए एक कानून बनाया जाए

  • तस्करों और मिलावटखोरों की शत-प्रतिशत चल-अचल संपत्ति जब्त करने तथा उन्हें सश्रम आजीवन कारावास की सजा देने के लिए एक कानून बनाया जाए

  • भूमाफियाओं और हवाला कारोबरियों की शत-प्रतिशत चल-अचल संपत्ति जब्त करने तथा उन्हें सश्रम आजीवन कारावास की सजा देने के लिए एक नया कानून बनाया जाए

  • कालाधन, बेनामी संपत्ति और आय से अधिक संपत्ति रखने वालों की शत-प्रतिशत चल-अचल संपत्ति जब्त करने तथा उन्हें सश्रम आजीवन कारावास की सजा देने के लिए एक नया कानून बनाया जाए

बता दें कि अश्विनी उपाध्याय ने समान शिक्षा, समान चिकित्सा, समान नागरिक संहिता, तीन तलाक, बहुविवाह, हलाला, मुताह, शरिया अदालत, आर्टिकल 35A, आर्टिकल 370, जनसंख्या नियंत्रण तथा चुनाव सुधार, प्रशासनिक सुधार, पुलिस सुधार, न्यायिक सुधार और शिक्षा सुधार पर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में 50 से अधिक जनहित याचिकाएं दाखिल की हैं. इन्हें भारत का ‘पीआईएल मैन’ भी कहा जाता है.


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