UP: मथुरा में सावन माह की कांवड़ यात्रा के बीच सोशल मीडिया पर वायरल एक मौलाना के बयान को लेकर संत समाज ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। वायरल वीडियो में मुस्लिम कांवड़ियों के बुरखा और टोपी पहनकर यात्रा करने को लेकर की गई टिप्पणी के बाद यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। संतों का कहना है कि यदि किसी भी समुदाय के लोगों की कांवड़ यात्रा में सच्ची आस्था है तो उन्हें इसकी धार्मिक परंपराओं और मर्यादाओं का सम्मान करना चाहिए।
स्वामी यशवीर महाराज बोले- आस्था दिखे, दिखावा नहीं
ब्रज के संत स्वामी यशवीर महाराज ने कहा कि कांवड़ यात्रा सनातन आस्था और पवित्रता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यदि कोई मुस्लिम महिला या पुरुष श्रद्धा के साथ सनातनी परिधान और भगवा वस्त्र धारण कर गंगाजल लेकर आते हैं तो उनका स्वागत है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि केवल प्रचार या सुर्खियां बटोरने के उद्देश्य से धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल करना उचित नहीं है और इससे यात्रा की गरिमा प्रभावित होती है।
दिनेश फलाहारी महाराज ने रखी कड़ी राय
श्रीकृष्ण जन्मभूमि प्रकरण के याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी महाराज ने कहा कि कांवड़ यात्रा पूरी तरह सनातन परंपराओं से जुड़ी धार्मिक साधना है। उनके अनुसार, यदि कोई मुस्लिम इस यात्रा में भाग लेना चाहता है तो उसे सनातन रीति-रिवाजों को स्वीकार करते हुए विधि-विधान के साथ यात्रा करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग पारंपरिक वेशभूषा से अलग तरीके अपनाकर सनातन परंपरा का उपहास करने का प्रयास करते हैं, जिसका विरोध किया जाएगा।
संतों ने कहा- परंपरा के साथ कोई समझौता नहीं
ब्रज के अन्य संतों ने भी एक स्वर में कहा कि कांवड़ यात्रा हजारों वर्षों से चली आ रही धार्मिक परंपरा है और इसमें शामिल होने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को इसकी मर्यादा का पालन करना चाहिए। संतों ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति की धार्मिक आस्था का सम्मान किया जा सकता है, लेकिन परंपराओं के स्वरूप में बदलाव या उनके साथ छेड़छाड़ स्वीकार नहीं की जाएगी।
प्रशासन से अनुशासन बनाए रखने की मांग
कांवड़ यात्रा में विभिन्न समुदायों की भागीदारी को लेकर समाज में अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं। जहां कुछ लोग इसे सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक मानते हैं, वहीं कुछ इसे धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप के रूप में देखते हैं। इस बीच संत समाज ने प्रशासन से मांग की है कि कांवड़ मार्ग पर अनुशासन, सुरक्षा और परंपराओं के पालन को सुनिश्चित किया जाए, ताकि यात्रा शांतिपूर्ण और गरिमापूर्ण ढंग से संपन्न हो।
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