बलरामपुर अवैध धर्मांतरण मामले में NIA कोर्ट में आरोप तय, छांगुर समेत 8 आरोपियों पर गंभीर धाराएं

लखनऊ : बलरामपुर जिले के अवैध धर्मांतरण के बड़े मामले में लखनऊ स्थित NIA स्पेशल कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। मुख्य आरोपी छांगुर और सात अन्य आरोपियों पर कोर्ट ने औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिए हैं। अब इस मामले में 2 मई 2026 से नियमित गवाही शुरू हो जाएगी। कोर्ट ने इस मामले को काफी गंभीर माना है और सुनवाई को तेजी से पूरा करने का संकेत दिया है।

इन आरोपियों पर तय हुए आरोप

NIA स्पेशल कोर्ट ने मुख्य आरोपी छांगुर, राजेश, नवीन रोहरा, नीतू उर्फ नसरीन, सबरोज, शहाबुद्दीन, रशीद और महबूब पर आरोप तय किए हैं। इन सभी पर अवैध रूप से लोगों का धर्मांतरण कराने, धोखाधड़ी, प्रलोभन देने और संगठित तरीके से गतिविधियां चलाने के आरोप हैं। कोर्ट ने आरोप पत्र में दिए गए सबूतों और NIA की जांच रिपोर्ट को पर्याप्त मानते हुए यह फैसला लिया है।

शरिया कानून लागू करना और मुस्लिम जनसंख्या बढ़ाना था मुख्य लक्ष्य

NIA की जांच के अनुसार, आरोपी छांगुर के नेतृत्व में एक गिरोह सक्रिय था जिसका उद्देश्य गरीब हिंदू परिवारों के युवाओं और लड़कियों को प्रलोभन देकर या धोखे से इस्लाम धर्म अपनाने के लिए मजबूर करना था। गिरोह का कथित लक्ष्य शरिया कानून के प्रभाव को बढ़ाना और मुस्लिम जनसंख्या को तेजी से बढ़ाना था। NIA ने आरोप लगाया है कि आरोपी इस काम को संगठित रूप से कर रहे थे और इसमें विदेशी फंडिंग तथा अंतरराज्यीय नेटवर्क का भी संदेह है।


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बलरामपुर से शुरू हुई थी NIA की जांच

यह पूरा मामला बलरामपुर जिले से सामने आया था जहां कई युवतियों और युवकों के धर्मांतरण की शिकायतें दर्ज हुई थीं। NIA ने सूत्रों के आधार पर छापेमारी की और बड़े पैमाने पर दस्तावेज, मोबाइल फोन, चैट रिकॉर्ड और अन्य सबूत जुटाए। जांच में पता चला कि आरोपी महिलाओं को नौकरी, शादी और बेहतर जीवन का लालच देकर धर्म परिवर्तन कराते थे। कई मामलों में जबरन या धोखे से निकाह भी कराए गए।

NIA का दावा : संगठित साजिश का मामला

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने इस मामले को मात्र स्थानीय घटना नहीं, बल्कि एक बड़े संगठित साजिश का हिस्सा बताया है। एजेंसी का कहना है कि आरोपी शरिया कानून के प्रचार और जनसांख्यिकीय परिवर्तन (demographic change) के एजेंडे पर काम कर रहे थे। कोर्ट ने NIA के इस स्टैंड को स्वीकार करते हुए सभी आठ आरोपियों पर UAPA, IPC की विभिन्न धाराओं और धर्मांतरण विरोधी कानून की धाराओं के तहत आरोप तय किए हैं।

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अब 2 मई से गवाही, मामले की निगरानी में तेजी

NIA स्पेशल कोर्ट के जज ने 2 मई 2026 को गवाही शुरू करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने सभी पक्षों को सख्त हिदायत दी है कि सुनवाई में अनावश्यक देरी न की जाए। आरोपी फिलहाल जेल में हैं और उनके जमानत आवेदन पहले ही खारिज हो चुके हैं। इस मामले पर बलरामपुर सहित आसपास के जिलों में काफी चर्चा है और स्थानीय लोग NIA की कार्रवाई का स्वागत कर रहे हैं।

धर्मांतरण विरोधी कानून पर सियासी-सामाजिक बहस

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत ऐसे कई मामले सामने आए हैं। बलरामपुर मामला उनमें से एक है जिसमें NIA स्तर की जांच हो रही है। भाजपा इसे “लव जिहाद” और “जनसांख्यिकीय जिहाद” से जोड़कर देख रही है, जबकि विपक्ष इसे साम्प्रदायिक एजेंडे का हिस्सा बताता है।

NIA स्पेशल कोर्ट का यह फैसला पूरे मामले को नई दिशा देगा। 2 मई से शुरू होने वाली गवाही में मुख्य गवाहों की गवाही, फॉरेंसिक रिपोर्ट और चैट रिकॉर्ड्स पर मुख्य रूप से बहस होगी। पूरा मामला उत्तर प्रदेश में अवैध धर्मांतरण की गतिविधियों पर नजर रखने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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