राष्ट्र सेवक नहीं, राष्ट्रीय सरेंडर संघ… राहुल गांधी ने RSS पर हमला, राम माधव के बयान से बढ़ा विवाद

देश की राजनीति में एक बार फिर तीखी बयानबाजी देखने को मिली है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आरएसएस से जुड़े वरिष्ठ नेता राम माधव के अमेरिका में दिए गए बयान को लेकर कड़ा हमला बोला है। इस पूरे मामले ने राजनीतिक बहस को और गर्मा दिया है।

राहुल गांधी का आरएसएस पर तीखा प्रहार

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए आरएसएस को निशाने पर लिया। उन्होंने संगठन को राष्ट्रिय ‘सरेंडर संघ’ और ‘फर्जी राष्ट्रवाद’ से जोड़ते हुए तीखी टिप्पणी की।राहुल गांधी ने लिखा कि नागपुर में जिस तरह का राष्ट्रवाद दिखाया जाता है, वह अमेरिका में जाकर बदल जाता है। उन्होंने राम माधव के बयान का हवाला देते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी ने संघ की ‘असल सोच’ को उजागर कर दिया है।

अमेरिका में राम माधव के बयान से विवाद

यह विवाद तब शुरू हुआ जब राम माधव ने वाशिंगटन डीसी में हडसन इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित ‘न्यू इंडिया कॉन्फ्रेंस’ में भाग लिया। इस कार्यक्रम में उन्होंने अमेरिका-भारत संबंधों और भारत की विदेश नीति पर टिप्पणी की थी।उन्होंने चर्चा के दौरान कहा था कि भारत ने कुछ मामलों में ऊर्जा और व्यापार नीति को लेकर बड़े निर्णय लिए हैं, जिसमें रूस से तेल आयात और टैरिफ जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया था। उनके इसी बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई।

राम माधव ने दी सफाई

बढ़ते विवाद के बाद राम माधव ने अपने बयान पर सफाई जारी की। उन्होंने स्वीकार किया कि चर्चा के दौरान उन्होंने कुछ तथ्य गलत तरीके से प्रस्तुत कर दिए थे।उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ने रूस से तेल आयात बंद करने पर कभी सहमति नहीं दी थी और न ही 50% टैरिफ को स्वीकार किया गया है। राम माधव ने कहा कि वह एक अन्य पैनलिस्ट के तर्क को समझाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उनके बयान में तथ्यात्मक त्रुटि रह गई। इसके लिए उन्होंने सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी।

भारत की ऊर्जा नीति पर मौजूदा स्थिति

सूत्रों के अनुसार, भारत 2022 से रूस से कच्चा तेल आयात कर रहा है। शुरुआत में यह हिस्सा बेहद कम था, लेकिन समय के साथ इसमें तेजी से वृद्धि हुई।रिपोर्ट्स बताती हैं कि भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी बाद के वर्षों में बढ़कर लगभग 20% तक पहुंच गई। वहीं, देश का बड़ा हिस्सा अभी भी पारंपरिक आपूर्ति मार्गों और अन्य देशों से आयात पर निर्भर है। इसके अलावा, भारत के तेल आयात का एक बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों से होकर गुजरता है।

राजनीतिक बहस जारी

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर देश में विदेश नीति और राजनीतिक बयानबाजी को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ विपक्ष सरकार और संघ से जुड़े बयानों को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर सफाई और तथ्यात्मक सुधार भी सामने आ रहे हैं।

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