UP: वाराणसी (Varanasi) में मणिकर्णिका घाट (Manikarnika Ghat) पर मसाने की होली (चिताओं के भस्म से होली खेलने) के आयोजन के खिलाफ डोम राजा परिवार (Dom Raja Parivar) और काशी विद्वत परिषद (Kashi Vidvat Parishad) ने एकजुट होकर विरोध जताया है। दोनों संगठनों ने इस आयोजन को हुड़दंगई, अराजकता फैलाने वाला और धार्मिक भावनाओं के प्रति असम्मानजनक बताया है। उन्होंने जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस कमिशनर कार्यालय में लिखित शिकायत देकर मणिकर्णिका घाट पर इस तरह के आयोजन पर पूर्ण रोक लगाने की मांग की है।
डोम राजा परिवार का रुख
डोम राजा परिवार, जो सदियों से मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार की परंपरा संभाल रहा है, उन्होंने कहा कि चिताओं के भस्म से होली खेलना उनकी परंपरा और धार्मिक आस्था के प्रति अपमान है। परिवार के सदस्यों ने बताया कि यह आयोजन घाट की पवित्रता को भंग करता है और शवदाह की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि होली का उत्सव खुशी और रंगों का है, लेकिन मसाने की होली मौत और भस्म से जुड़ी है, जो अनुचित और अपमानजनक है। परिवार ने मांग की कि प्रशासन इस तरह के आयोजनों पर सख्त रोक लगाए।
काशी विद्वत परिषद की आपत्ति
काशी विद्वत परिषद ने भी इस आयोजन पर कड़ी आपत्ति जताई है। परिषद के विद्वानों का कहना है कि मणिकर्णिका घाट हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक महत्व का स्थान है। यहां चिताओं का भस्म होली के रूप में इस्तेमाल करना धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है। परिषद ने इसे हुड़दंगई और अराजकता फैलाने वाला बताया और प्रशासन से अपील की कि इस तरह के आयोजनों को तत्काल रोका जाए।
DM और पुलिस कमिशनर को शिकायत
डोम राजा परिवार और काशी विद्वत परिषद ने संयुक्त रूप से जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस कमिशनर कार्यालय में लिखित शिकायत दाखिल की है। शिकायत में कहा गया है कि यह आयोजन सार्वजनिक शांति भंग करने, धार्मिक भावनाओं को आहत करने और घाट की पवित्रता को नष्ट करने वाला है। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि मणिकर्णिका घाट पर ऐसे किसी भी आयोजन पर रोक लगाई जाए और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
जिला प्रशासन ने शिकायत मिलने के बाद संज्ञान लिया है। डीएम ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं और कहा है कि धार्मिक स्थलों की पवित्रता और सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए कोई भी उचित कदम उठाया जाएगा। पुलिस कमिशनर ने भी कहा कि यदि आयोजन से कोई सार्वजनिक अशांति या धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचने की आशंका है, तो उस पर रोक लगाई जा सकती है।
Also Read: ‘कालनेमि, राहु और रावण कुछ लोग…’, यौन शोषण FIR पर भड़के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
सामाजिक और धार्मिक प्रभाव
यह मामला वाराणसी में धार्मिक संवेदनशीलता और परंपराओं को लेकर बहस छेड़ रहा है। एक पक्ष का कहना है कि मसाने की होली सदियों पुरानी परंपरा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे अपमानजनक और अशोभनीय बता रहा है। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से चर्चा में है।
( देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं.)









































