‘सच बोलूंगा तो परेशानी में आ जाऊंगा…’, राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर उठे सवालों पर ये क्या बोल गए बृजभूषण शरण सिंह!

UP: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला लगातार राजनीतिक तूल पकड़ता जा रहा है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह इस मुद्दे को लेकर राम मंदिर ट्रस्ट पर सवाल उठा रहे हैं। इसी बीच, राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का बयान भी सुर्खियों में आ गया है।

‘सच बोलने की अभी हिम्मत नहीं’

गोंडा पहुंचने पर मीडिया से बातचीत करते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि यदि वह पूरी सच्चाई बताएंगे तो उन्हें बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने संकेतों में कहा कि इस मामले से जुड़े लोग बहुत प्रभावशाली हैं और फिलहाल उनके बारे में खुलकर बोलने की उनकी हिम्मत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि उचित समय आने पर वह सच्चाई सामने रखेंगे।

तुलसीदास की चौपाई के जरिए कही अपनी बात

पूर्व सांसद ने गोस्वामी तुलसीदास की प्रसिद्ध चौपाई “जिमि दसनन महुं जीभ बिचारी, सुनहु पवनसुत रहनि हमारी” का उल्लेख करते हुए अपनी स्थिति की तुलना 32 दांतों के बीच मौजूद कोमल जीभ से की। उनका कहना था कि विभीषण ने भी इसी चौपाई के माध्यम से अपनी मजबूरी व्यक्त की थी। वहीं, जब उनसे राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के बारे में सवाल पूछा गया तो उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

पूर्व लेखा प्रभारी के आरोपों से बढ़ी हलचल

राम मंदिर के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह के दावों ने इस पूरे विवाद को और गंभीर बना दिया है। उनका आरोप है कि कई वर्षों से चढ़ावे की रकम में गड़बड़ी होती रही और इसकी जानकारी उन्होंने संबंधित अधिकारियों को भी दी थी। महिपाल सिंह का दावा है कि शिकायत के बाद कार्रवाई करने के बजाय उन्हें ही उनके पद से हटा दिया गया, जबकि नोटों की गिनती वाले कक्ष के कई महीनों के सीसीटीवी फुटेज भी हटवा दिए गए।

नोटों की गिनती प्रक्रिया पर उठाए सवाल

महिपाल सिंह के अनुसार, मंदिर में चढ़ावे की राशि की गिनती के लिए 14 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाती थी और बैंक के अधिकारी नोटों के बक्से लेकर जाते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि रिकॉर्ड में दस गड्डियां दर्ज की जाती थीं, जबकि बक्सों में वास्तविक संख्या अधिक होती थी। एक बार संदेह होने पर दोबारा गिनती कराई गई तो करीब पांच लाख रुपये अतिरिक्त पाए गए। इसके बाद उन्होंने मामले की शिकायत की, लेकिन उनके अनुसार कार्रवाई के बजाय उन्हें ही जिम्मेदारी से हटा दिया गया।

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