बिहार से दिल्ली तक,राज्यसभा के बाद क्या होगी नीतीश कुमार की नई भूमिका?

बिहार की राजनीति में इन दिनों एक बड़ा सवाल चर्चा में है क्या दो दशक से राज्य की राजनीति के केंद्र में रहे मुख्यमंत्री Nitish Kumar अब दिल्ली की राजनीति में नई भूमिका निभाने जा रहे हैं? बिहार से राज्यसभा की पांच सीटों के लिए हो रहे चुनाव के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि नीतीश कुमार जल्द ही मुख्यमंत्री पद छोड़कर दिल्ली जा सकते हैं। विधानसभा में Janata Dal (United) और एनडीए के मजबूत संख्याबल के आधार पर उनकी राज्यसभा में जीत लगभग तय मानी जा रही है।राजनीतिक हलकों में यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर नीतीश कुमार दिल्ली जाते हैं तो उनकी नई भूमिका क्या होगी। सूत्रों और राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार उनके सामने तीन प्रमुख संभावनाएं दिखाई दे रही हैं।

1. क्या केंद्रीय कैबिनेट में मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी?

जदयू के नेताओं और पार्टी सूत्रों को उम्मीद है कि नीतीश कुमार को दिल्ली में सिर्फ राज्यसभा सांसद बनाकर नहीं रखा जाएगा। उन्हें केंद्र सरकार में कोई बड़ा मंत्रालय मिल सकता है। दरअसल National Democratic Alliance की मौजूदा सरकार में सहयोगी दलों की भूमिका काफी अहम हो गई है। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा अकेले बहुमत से कुछ सीटें पीछे रह गई थी, इसलिए जदयू जैसे सहयोगी दलों का समर्थन सरकार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जदयू के पास संसद में 12 सांसद हैं और बिहार विधानसभा में भी पार्टी की मजबूत मौजूदगी है। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि नीतीश कुमार को केंद्रीय मंत्रिमंडल में बड़ी भूमिका मिल सकती है।

नीतीश कुमार पहले भी केंद्र की राजनीति में अहम जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।

1989 में पहली बार लोकसभा सांसद बने

1990 में V. P. Singh की सरकार में कृषि राज्य मंत्री बने

1996 में Atal Bihari Vajpayee की सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे

2001 से 2004 के बीच रेल मंत्री के रूप में काम किया

इसी अनुभव के आधार पर माना जा रहा है कि उन्हें केंद्र में कोई महत्वपूर्ण मंत्रालय दिया जा सकता है।

2. क्या एनडीए के संयोजक बन सकते हैं नीतीश?

अगर उन्हें मंत्री पद नहीं मिलता तो दूसरी बड़ी संभावना यह मानी जा रही है कि उन्हें एनडीए का संयोजक बनाया जा सकता है फिलहाल एनडीए गठबंधन में औपचारिक रूप से कोई संयोजक नहीं है। पहले यह जिम्मेदारी जदयू के वरिष्ठ नेता Sharad Yadav निभाते थे। उनसे पहले यह पद समाजवादी नेता George Fernandes के पास था। एनडीए संयोजक की भूमिका गठबंधन की राजनीति में काफी अहम मानी जाती है। संयोजक का मुख्य काम गठबंधन के सभी दलों के बीच तालमेल बनाए रखना, नेताओं से बातचीत करना और चुनावी रणनीति तय करने में भूमिका निभाना होता है। 2024 के बाद की राजनीति में जब गठबंधन की अहमियत बढ़ गई है, ऐसे में अनुभवी नेता के तौर पर नीतीश कुमार इस भूमिका के लिए उपयुक्त माने जा रहे हैं।

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3. क्या सिर्फ राज्यसभा सांसद बनकर रह जाएंगे?

बिहार के राजनीतिक गलियारों में तीसरी चर्चा यह भी है कि नीतीश कुमार को राज्यसभा भेजकर सक्रिय राजनीति से धीरे-धीरे अलग किया जा सकता है। पिछले कुछ समय में उनके कई बयान और घटनाएं विवादों में भी रहे हैं। इसके अलावा उनकी उम्र और स्वास्थ्य को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं होती रही हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केंद्र सरकार उन्हें केवल राज्यसभा सदस्य के रूप में ही सीमित भूमिका में रख सकती है। हालांकि यह संभावना अभी स्पष्ट नहीं है और इसे लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है।

लुटियंस दिल्ली में होगा नया ठिकाना

अगर नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्य बनते हैं तो उन्हें दिल्ली के प्रतिष्ठित लुटियंस दिल्ली इलाके में सरकारी आवास मिल सकता है। उनके राजनीतिक अनुभव और पूर्व केंद्रीय मंत्री के दर्जे को देखते हुए उन्हें टाइप-8 श्रेणी का बंगला मिलने की संभावना जताई जा रही है। इसी श्रेणी के बंगले में देश के कई वरिष्ठ नेता रहते हैं, जिनमें Amit Shah, Rajnath Singh और Rahul Gandhi जैसे नेता शामिल हैं।

क्या बिहार की राजनीति में आएगा बड़ा बदलाव?

अगर नीतीश कुमार सचमुच दिल्ली की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने जाते हैं तो इसका असर बिहार की राजनीति पर भी पड़ेगा।करीब दो दशकों तक मुख्यमंत्री रहने के बाद उनका दिल्ली जाना राज्य की सत्ता और नेतृत्व संरचना में बड़ा बदलाव ला सकता है। फिलहाल राज्यसभा चुनाव और उसके बाद की राजनीतिक गतिविधियां तय करेंगी कि नीतीश कुमार की अगली राजनीतिक पारी दिल्ली में किस भूमिका के साथ शुरू होती है।

INPUT-ANANYA MISHRA

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