बड़े-बड़े दावों की निकली हवा… अफसरों की लापरवाही एक्सपोज! लखनऊ-नोएडा रैंकिंग में धराशायी, सीएम डैशबोर्ड रैंकिंग ने खोली पोल

उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए हालिया सीएम डैशबोर्ड रैंकिंग में लखनऊ और नोएडा का प्रदर्शन बेहद खराब सामने आया है। 75 जिलों की सूची में लखनऊ 70वें स्थान पर रहा, जबकि नोएडा सबसे आखिरी यानी 75वें नंबर पर पहुंच गया। इससे साफ संकेत मिलता है कि बड़े और विकसित माने जाने वाले शहर भी जमीनी स्तर पर अपेक्षित काम नहीं कर पा रहे हैं।

बड़े शहरों की नाकामी, छोटे जिलों ने मारी बाजी

जहां एक ओर कानपुर देहात (74वां), प्रयागराज और बागपत (72वां), तथा आगरा (71वां) जैसे शहर निचले पायदान पर रहे, वहीं पिछड़े माने जाने वाले जिलों ने शानदार प्रदर्शन किया। हमीरपुर 9.87 अंकों के साथ पहले स्थान पर रहा, जबकि औरैया और बरेली 9.76 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर पहुंचे।

टॉप रैंकिंग में उभरते जिले

रैंकिंग में रामपुर ने 9.71 अंक लेकर चौथा स्थान हासिल किया। वहीं एटा और खीरी संयुक्त रूप से पांचवें स्थान पर रहे। यह दर्शाता है कि छोटे और अपेक्षाकृत कम संसाधन वाले जिले भी बेहतर प्रशासन और कार्यशैली के दम पर शीर्ष स्थान हासिल कर सकते हैं।

86 योजनाओं के आधार पर तय होती है रैंकिंग

सीएम डैशबोर्ड की यह रैंकिंग 86 सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर आधारित होती है, जिसमें पीडब्ल्यूडी, सिंचाई, ऊर्जा, एमएसएमई, चिकित्सा, कृषि, ग्रामीण विकास, महिला एवं बाल विकास समेत कई विभाग शामिल हैं। मार्च में जारी यह रिपोर्ट पूरे वित्तीय वर्ष 2025-26 के कामकाज का आकलन प्रस्तुत करती है। इस रैंकिंग ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल ‘शो विंडो’ बनने से विकास नहीं होता, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी काम जरूरी है।

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