Noida Labour Protest: ग्रेटर नोएडा और नोएडा क्षेत्र में श्रमिकों से जुड़े मामलों में श्रम विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। कंपनियों को श्रमिक उपलब्ध कराने वाले ठेकेदारों के खिलाफ व्यापक जांच के बाद बड़ी कार्रवाई की गई है। विभाग ने पाया कि कई ठेकेदार श्रम कानूनों का पालन नहीं कर रहे थे और श्रमिकों को उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा था।
203 ठेकेदारों पर नियम उल्लंघन का आरोप
जांच में सामने आया कि 24 कंपनियों से जुड़े कुल 203 ठेकेदारों ने श्रमिकों को पूरा लाभ नहीं दिया। इस मामले में अधिकारियों ने ठेकेदारों के लाइसेंस निरस्त करने, उनसे धनराशि वसूलने और उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। संबंधित ठेकेदारों को कुल 1.16 करोड़ रुपये से अधिक की राशि श्रमिकों को देने के लिए नोटिस जारी किया गया है।
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वेतन और सुविधाओं में गड़बड़ी उजागर
श्रम विभाग के अनुसार, कई ठेकेदारों ने वेतन भुगतान में अनियमितता बरती और कर्मचारियों को तय सुविधाएं नहीं दीं। यह भी स्पष्ट किया गया कि श्रमिकों के वेतन से भविष्य निधि (PF) और कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) के अलावा अन्य किसी प्रकार की कटौती नहीं की जा सकती। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त वसूली की जाएगी।
नई वेतन दरें और भुगतान की समयसीमा तय
अधिकारियों ने बताया कि गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद में श्रमिकों के वेतन में 21 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जो 1 अप्रैल से लागू हो चुकी है। साथ ही निर्देश दिया गया है कि हर महीने की 10 तारीख तक श्रमिकों को वेतन देना अनिवार्य होगा। समय पर वेतन न देने या कम भुगतान करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
हिंसक प्रदर्शनों के बाद सख्ती बढ़ी
हाल ही में नोएडा और ग्रेटर नोएडा में वेतन वृद्धि को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद यह कार्रवाई और तेज हुई है। जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि कुछ मामलों में ठेकेदारों की भूमिका संदिग्ध रही। ऐसे में श्रम विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि श्रमिकों के अधिकारों की अनदेखी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।














































