राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के खिलाफ दोहरी नागरिकता से जुड़े मामले में फिलहाल एफआईआर दर्ज नहीं होगी। इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) की लखनऊ बेंच ने पहले दिए गए अपने ही आदेश पर रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बिना नोटिस दिए किसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देना उचित प्रक्रिया का पालन नहीं करता। अब इस मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को तय की गई है।
राहुल गांधी पर याचिका में लगाए गए गंभीर आरोप
यह मामला कर्नाटक निवासी विग्नेश शिशिर द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है, जिसमें राहुल गांधी पर भारतीय न्याय संहिता, आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने इन आरोपों की जांच की मांग की थी, जिस पर अदालत ने पहले संज्ञान लेते हुए एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था।
विग्नेश शिशिर का एक्स पोस्ट
ONCE AGAIN MY FIELD INTELLIGENCE PROVED 100% SPOT ON . 🙏👍
SO CASE WHICH WAS ALLOWED AND DECIDED BY HON’BLE ALLAHABAD HIGH COURT AT LUCKNOW BENCH YESTERDAY AT 4 PM.
TODAY BECAME AGAIN PENDING MATTER IS AGAIN POSTED FOR HEARING ??
BEFORE 3 PM ALLOWED.
AFTER 4 PM PENDING ??… pic.twitter.com/YrlsBXquxQ
— VIGNESH SHISHIR (@VIGNESHBJP_KTK) April 18, 2026
एक बार फिर मेरी फील्ड इंटेलिजेंस शत प्रतिशत सटीक साबित हुई।कल शाम 4 बजे माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच द्वारा स्वीकृत और निर्णयित किया गया मामला आज फिर से लंबित हो गया है। शाम 3 बजे से पहले स्वीकृत। शाम 4 बजे के बाद लंबित? ईश्वर मेरे देश की रक्षा करे। मैं भारत के सभी माननीय उच्च न्यायालयों और माननीय सर्वोच्च न्यायालय में विश्वास रखता हूँ।
सीबीआई को जांच सौंपने की बात
शुक्रवार को सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एफआईआर दर्ज कर जांच को सीबीआई को सौंपने की बात कही थी। इस फैसले ने राजनीतिक हलकों में भी हलचल पैदा कर दी थी, क्योंकि इसमें एक बड़े नेता के खिलाफ आपराधिक जांच की संभावना जताई गई थी।
फैसले की समीक्षा के बाद बदला रुख
लखनऊ
राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर का अपना आदेश हाईकोर्ट ने रोका।
हाईकोर्ट ने माना कि राहुल गांधी को बिना नोटिस जारी किए नहीं दिया जा सकता एफआईआर का आदेश।
कथित दोहरी नागरिकता मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के कल ओपन कोर्ट में हाई कोर्ट ने दिया था… https://t.co/tmrGTuUDd4 pic.twitter.com/dI1X7lw4c0— Awanish M Vidyarthi (@awanishvidyarth) April 18, 2026
हालांकि, आदेश जारी होने से पहले न्यायमूर्ति ने अपने निर्णय की दोबारा समीक्षा की। उन्होंने 2014 के एक पूर्व फैसले का हवाला देते हुए पाया कि ऐसे मामलों में आरोपी को पहले नोटिस देना अनिवार्य है। इसी आधार पर अदालत ने अपने पहले आदेश पर रोक लगा दी और कहा कि बिना नोटिस दिए आगे बढ़ना न्यायसंगत नहीं होगा।












































