आधुनिक प्रक्रिया से 79 वर्षीय बुजुर्ग मरीज को तुरंत आराम, ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया का सफल उपचार

गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) गोरखपुर ने चेहरे के लंबे समय से चल रहे गंभीर दर्द के इलाज में एक और उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। 79 वर्षीय एक बुजुर्ग पुरुष पिछले 15 वर्षों से चेहरे के असहनीय दर्द से जूझ रहे थे। दर्द इतना तीव्र था कि रोजमर्रा की छोटी-छोटी गतिविधियां भी मुश्किल हो गई थीं। अब एम्स गोरखपुर के विशेषज्ञों ने आधुनिक तकनीक से उन्हें तुरंत राहत दिलाई है।

यह सफल उपचार डॉ. संतोष कुमार शर्मा, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, एनेस्थीसियोलॉजी, पेन मेडिसिन एवं क्रिटिकल केयर विभाग द्वारा किया गया। उन्होंने रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन (RFA) – गैसेरियन गैंग्लियन प्रक्रिया अपनाई, जो न्यूनतम इनवेसिव और अत्यधिक प्रभावी मानी जाती है।

बिजली के झटके जैसा दर्द, खाना-बोलना तक मुश्किल

मरीज को चेहरे के दाहिने हिस्से में बिजली के झटके जैसा तेज और तीखा दर्द होता था, जो माथे, नाक और जबड़े तक फैल जाता था। दर्द की तीव्रता 7/10 के आसपास थी। चबाने, बोलने, दांत ब्रश करने या यहां तक कि हल्के स्पर्श से भी दर्द के दौरे पड़ने लगते थे।

15 साल की इस लंबी पीड़ा ने मरीज के सामान्य जीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया था। वे दैनिक कार्यों से दूर हो चुके थे और लगातार दर्द की वजह से तनाव तथा चिंता में रहते थे। कई बार सामान्य दवाइयां भी राहत नहीं दे पा रही थीं।

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विशेष प्रक्रिया से तुरंत राहत

एम्स गोरखपुर में विस्तृत जांच के बाद डॉक्टरों की टीम ने रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन (RFA) ऑफ गैसेरियन गैंग्लियन प्रक्रिया का फैसला लिया। यह प्रक्रिया ऑपरेशन थिएटर में स्थानीय एनेस्थीसिया के तहत की गई।

इस आधुनिक तकनीक में चेहरे की दर्द वाली ट्राइजेमिनल नस (Trigeminal Nerve) के प्रभावित हिस्से पर नियंत्रित रेडियोफ्रीक्वेंसी ऊर्जा दी जाती है। इससे दर्द के संकेतों को ब्लॉक या कम कर दिया जाता है, जबकि आसपास के स्वस्थ ऊतकों को नुकसान नहीं पहुंचता।

प्रक्रिया के तुरंत बाद मरीज को स्पष्ट राहत महसूस हुई। वे बिना किसी बड़े दर्द के सामान्य गतिविधियां करने लगे। यह परिणाम मरीज और उनके परिवार दोनों के लिए बहुत राहत भरा रहा।

क्या है ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया?

डॉ. संतोष कुमार शर्मा ने बताया कि ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया चेहरे की मुख्य संवेदी नस (ट्राइजेमिनल नर्व) में समस्या के कारण होने वाली एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है। इसमें दर्द अचानक, तेज और बिजली के झटके जैसा होता है। यह बीमारी अक्सर 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में देखी जाती है, लेकिन किसी भी उम्र में हो सकती है।

कई मामलों में रक्त वाहिका का नस पर दबाव, ट्यूमर, मल्टीपल स्क्लेरोसिस या कोई स्पष्ट कारण नहीं भी होता। लंबे समय तक अनुपचारित रहने पर यह दर्द मरीज के जीवन की गुणवत्ता को बुरी तरह प्रभावित करता है।

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लक्षण जिन्हें नजरअंदाज न करें

ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया के प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं:

– चेहरे में बिजली के झटके या चाकू घोंपने जैसा तेज दर्द
– खाने, बोलने, मुस्कुराने, दांत साफ करने या ठंडा/गर्म पानी पीने से दर्द बढ़ना
– दर्द के बार-बार आने वाले छोटे-छोटे दौरे (seconds से minutes तक)
– दर्द आमतौर पर चेहरे के एक तरफ ही होता है (दाएं या बाएं)
– दर्द के साथ कभी-कभी चेहरा लाल होना या आंसू आना

ये लक्षण सामान्य दर्द से अलग होते हैं। अगर ऐसे दर्द बार-बार हो रहे हों तो तुरंत पेन स्पेशलिस्ट या न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए।

इलाज संभव है – घबराएं नहीं

डॉ. शर्मा के अनुसार, ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया पूरी तरह इलाज योग्य है। इलाज दो स्तरों पर किया जाता है:

1. दवाइयां : शुरुआत में कार्बामाजेपिन जैसी दवाएं दी जाती हैं, जो कई मरीजों को राहत देती हैं।
2. इंटरवेंशनल प्रक्रियाएं : जब दवाएं पर्याप्त राहत न दें तो RFA, बैलून कंप्रेशन, ग्लिसरॉल इंजेक्शन या माइक्रोवस्कुलर डीकंप्रेशन सर्जरी जैसे विकल्प उपलब्ध हैं।

RFA जैसी प्रक्रिया दिन भर की है, न्यूनतम इनवेसिव है और ज्यादातर मरीजों को तुरंत या बहुत जल्दी राहत मिलती है। जरूरत पड़ने पर इसे दोहराया भी जा सकता है।

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पूर्वांचल के मरीजों के लिए बड़ी राहत

पहले ऐसे जटिल दर्द के मरीजों को इलाज के लिए लखनऊ, दिल्ली या अन्य बड़े शहरों जाना पड़ता था। अब एम्स गोरखपुर में पेन मेडिसिन विभाग की उन्नत सुविधाओं के कारण स्थानीय स्तर पर ही विश्वस्तरीय इलाज उपलब्ध है। इससे समय, खर्च और परेशानी तीनों बच रहे हैं।

मरीजों के लिए महत्वपूर्ण संदेश

– चेहरे का तेज, झटके जैसा दर्द कभी भी सामान्य नहीं होता।
– लंबे समय तक दर्द सहने की कोई जरूरत नहीं है।
– समय रहते पेन मेडिसिन विशेषज्ञ से संपर्क करें।
– सही और आधुनिक इलाज से तुरंत राहत संभव है।
– दर्द को नजरअंदाज न करें, क्योंकि समय पर उपचार से जीवन पूरी तरह सामान्य हो सकता है।

एम्स गोरखपुर के इस सफल केस ने साबित कर दिया है कि उन्नत पेन मैनेजमेंट तकनीकें अब पूर्वांचल में भी उपलब्ध हैं। यदि आप या आपके परिवार में कोई भी ऐसे लक्षण दिख रहे हों तो बिना देरी किए एम्स गोरखपुर के पेन क्लिनिक से संपर्क करें।

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