कानपुर: कचहरी परिसर में एक युवा अधिवक्ता ने पांचवीं मंजिल से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली, जिससे पूरे न्यायिक परिसर में हड़कंप मच गया। मृतक की पहचान 25 वर्षीय प्रियांशु श्रीवास्तव के रूप में हुई है। घटना के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इस दुखद घटना ने वकीलों और न्यायिक अधिकारियों के बीच शोक का माहौल पैदा कर दिया है।
व्हाट्सएप स्टेटस बना जांच का अहम आधार
आत्महत्या से पहले प्रियांशु ने व्हाट्सएप पर दो पन्नों का एक विस्तृत नोट साझा किया था, जिसे पुलिस ने जांच का मुख्य आधार बनाया है। इस नोट में उन्होंने अपने जीवन से जुड़ी कई व्यक्तिगत और भावनात्मक बातों का जिक्र किया। पुलिस अब इस डिजिटल साक्ष्य की गहन जांच कर रही है, साथ ही इसकी प्रामाणिकता भी सुनिश्चित की जा रही है।
बचपन के अनुभव और पिता पर गंभीर आरोप
सुसाइड नोट में प्रियांशु ने अपने पिता पर मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने लिखा कि बचपन में छोटी-छोटी बातों पर उन्हें अपमानित किया जाता था, यहां तक कि एक बार आम का जूस पीने पर उन्हें कपड़े उतरवाकर घर से बाहर निकाल दिया गया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कम नंबर आने पर भी उन्हें इसी तरह अपमानित करने की धमकी दी जाती थी, जिससे उनके मन पर गहरा असर पड़ा।
करियर और पहचान को लेकर निराशा
प्रियांशु ने अपने नोट में पेशेवर जीवन से जुड़ी निराशा भी व्यक्त की। उन्होंने बताया कि वह अपने पिता के चैंबर में काम करते थे, लेकिन उनकी खुद की कोई पहचान नहीं बन पा रही थी। उन्होंने लिखा कि उनका न कोई स्वतंत्र कार्यालय था और न ही उन्हें अपने काम का श्रेय मिलता था। इस वजह से वे खुद को लगातार दबाव और घुटन में महसूस कर रहे थे।
जांच जारी, कई पहलुओं पर पुलिस की नजर
घटना के बाद बार एसोसिएशन के पदाधिकारी और न्यायिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग, डिजिटल साक्ष्य और अन्य परिस्थितियों की जांच की जा रही है। फिलहाल यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि मामला केवल पारिवारिक है या बाहरी कोई मामला।
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